रायपुर: छत्तीसगढ़ में मुसलमानों के विरुद्ध कुछ ग्रामीणों का शपथ लेने का एक वीडियो वायरल होने के पश्चात् विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस ने वायरल वीडियो की शिकायत प्राप्त होने पर मामले की तहकीकात आरम्भ कर दी है। दरअसल, 1 जनवरी को कुछ लोग पिकनिक मनाने लुंड्रा थाना इलाके के एक गांव पहुंचे थे जहां उनका स्थानीय ग्रामीण शख्स से झगड़ा हो गया। तत्पश्चात, अपराधी व्यक्तियों ने ग्रामीण तथा उसके परिवार वालों के साथ मारपीट की थी।
वही इस मामले में पुलिस ने शिकायत दर्ज करते हुए 6 युवकों को अरेस्ट किया था तथा अदालत में हाजिर करने के पश्चात् उन्हें जेल भेज दिया गया। हालांकि बाद में उन्हें रिहाई मिल गई तथा वे रिहा हो गए। अपराधियों की जमानत से ग्रामीण नाराज़ थे। ग्रामीणों ने लुंड्रा थाने का घेराव किया तथा इल्जाम लगाया कि पुलिस ने मामूली धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था जबकि पीड़ित पक्ष आदिवासी समाज से है। कमजोर मामला बनाने से ही अपराधी सरलता से छूट गए। यही नहीं, ग्रामीणों ने इसके पश्चात् अपराधियों के धर्म से किसी भी तरह का संबंध नहीं रखने का फैसला लेते हुए शपथ भी ली। शपथ का यही वीडियो अब सोशल मीडिया पर हो रहा है।
वही वायरल वीडियो में कुछ लोग हाथ आगे कर शपथ लेते नजर आ रहे हैं। वे मुसलमानों से किसी भी तरह के संबंध न रखने की बात बोल रहे हैं। वे बोल रहे हैं कि वे उनसे (अपराधियों के धर्म समुदाय के लोगों से) किसी भी तरह का संबंध नहीं रखेंगे। वह उनके धर्म से जुड़े लोगों की दुकानों से चीजें नहीं खरीदेंगे तथा न ही उन्हें जमीन बेचेंगे। वही पुलिस द्वारा मामले की जाँच की जा रही है।
सरगुजा के एएसपी विवेक शुक्ला ने बताया कि 1 जनवरी को बलरामपुर के कुंभकला गांव में आरा गांव के कुछ लोग नए साल का जश्न मना रहे थे. उसी दौरान दोनों पक्षों में विवादद हो गया. उन्होंने कहा कि आरा के रहने वाले विशेष समुदाय के लोगों का कुंभकला गांव के लोगों से झगड़ा हो गया था.
पुलिस ने संबंधित धाराओं में ग्रामीणों के खिलाफ केस दर्ज किया गया. वहीं दूसरे दिन इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था. हालांकि जेल भजने के बाद उन्हें तुरंत दमानत मिल गई थी. इस बात से कुंभकला गांव के लोग नाराज थे. पुलिस अधिकारी ने कहा कि बाहर के कुछ लोगों ने मौके का फायदा उठाते हुए गांव के लोगों को भड़काया और सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की.
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