डेस्क। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ज्ञानवावी मस्जिद को लेकर विवाद काफी गहराता जा रहा है। हाल ही में सर्वे की लीक रिपोर्ट के कई दावे सोशल मीडिया से लेकर अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर देखने को मिले हैं। पर सच क्या है ये सिर्फ मस्जिद परिसर में मौजूद है। ऐसे में एक व्यक्ति ऐसा भी है जो मस्जिद से मंदिर के प्रमाण जुटाने के लिए मुस्लिम बनकर ज्ञानवापी में प्रवेश करके सच को बाहर लाने के लिए मस्जिद परिसर में गया।
हम बात कर रहे हैं हरिहर पांडेय की। हरिहर पांडेय ने ज़ी न्यूज से खास बातचीत में इस बात का खुलासा किया। आइये जानते है हरिहर पांडेय ने ज्ञानवापी में क्या देखा।
यह बात उस समय की है जब मंदिर-मस्जिद को लेकर देश मे कई मामले देखने को मिले। 1991 के ज्ञानवापी मुकदमे के मुख्य पक्षकार हरिहर पाण्डेय ने एक Exclusive इंटरव्यू के दौरान बताया कि वो 1991 में मंदिर के सबूतों को इकट्ठा करने और अपनी आँखों से देखने के लिए मुस्लिम बनकर ज्ञानवापी परिसर में प्रवेश कर परिसर के अंदर गए थे। उन्होंने इस बातचीत में साफ कहा कि वो बाबा विश्वनाथ के पक्ष में सबूत इकट्ठा करने के लिए ज्ञानवापी परिसर में गए थे।
हरिहर ने कहा, ‘उस वक्त मैं रात 1 बजे जालीदार टोपी पहनकर ज्ञानवापी परिसर में गया। वहां मैंने मंदिर का ढांचा देखा, मैंने अपनी आंखों से मंदिर के सबूत देखे और कोर्ट को आकर बताया भी’।
उन्होंने कहा आगे कि, ‘मैंने कलश, कमल, हाथी, मगरमच्छ की कई आकृतियां देखीं। मैंने यह भी देखा कि मंदिर के मलबे को पत्थरों से ढक कर रखा गया है और उसके ऊपर इमारत भी बनाई गई है। यह मलबा हटना चाहिए, मलबा हटेगा तो ज्योतिर्लिंग सामने आएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस परिसर में कई शिवलिंग मिलेंगे।
मैं आखरी सास तक लडूंगा : हरिहर
हरिहर पांडेय ने आगे कहा कि उनके इस खुलासे के बाद उस समय मुस्लिम पक्ष उनसे मिलने पहुंचा था और उनसे पूछा गया कि इसका समाधान के क्या विकल्प हैं?
इसपर उन्होंने बताया कि, ‘मैंने मुस्लिम पक्ष से कहा कि सड़क किनारे मेरी 8 बीघे जमीन पड़ी है। आप ले लीजिए और मस्जिद शिफ्ट कर लीजिए। उन्होंने कहा वो तैयार नहीं हुए। इसपर मैंने फिर कहा कि हम मंदिर लेकर रहेंगे चाहे कुछ हो जाए और फिर मुस्लिम पक्ष वहा से चला गया। मैं ही आखिरी व्यक्ति हूं जो इस केस में जिंदा बचा हूं, मेरे साथ के दो पक्षकार अब नहीं रहे। मैं आखिरी सांस तक इस केस को लड़ूंगा, और मेरे बाद मेरे बेटे लड़ेंगे लेकिन बाबा विश्वनाथ को आजाद जरूर कराएंगे।’
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