लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 4 साल के कार्यकाल में चार लाख से ज्यादा लोगों को सरकारी नौकरी देने का दावा करते हुए बुधवार को कहा कि उनकी सरकार युवाओं को रोजगार के ज्यादा से ज्यादा मौके देने के लिए संकल्पबद्ध है। गौर करने वाली बात यह है कि अभ्यर्थियों से संवाद कर भर्ती प्रक्रिया की शुचिता और पारदर्शिता को सिर्फ अधिकारी ही नहीं बल्कि भर्ती प्रक्रिया के पश्चात खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कैंडिडेट के टैलेंट को परखते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी योगी सरकार की भर्ती प्रक्रिया की सराहना की है। राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने यहां उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के नवचयनित 3,209 नलकूप चालकों को नियुक्ति पत्र वितरण के बाद कहा कि उनकी सरकार ने चार लाख से अधिक लोगों को राजकीय सेवाओं में रोजगार दिया है।
योगी ने कहा कि उनकी सरकार ने 15 लाख से अधिक लोगों को निजी क्षेत्र में तथा लगभग 1.5 करोड़ लोगों को स्वरोजगार से जोड़ा है। प्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग में 1.37 लाख भर्तियां करने के साथ-साथ लगभग एक लाख सहायक अध्यापकों की भर्ती की है। सीएम ने कहा, ‘‘राज्य सरकार युवाओं को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर मुहैया कराने के लिए संकल्पबद्ध है। इसके लिए मिशन रोजगार के अन्तर्गत विभिन्न विभागों, संस्थाओं एवं निगमों आदि के समन्वित प्रयास से प्रदेश के नौजवानों को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य सरकार ने चार वर्षों में चार लाख नौजवानों को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया है, जिसकी प्राप्ति के लिए निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं।’’
उन्होंन कहा कि राज्य सरकार की नीति है कि पूरी निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं भेदभाव रहित ढंग से विभिन्न पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया पूर्ण की जाए। प्रदेश सरकार द्वारा युवाओं का चयन एवं पदस्थापन उनकी योग्यता और क्षमता के आधार पर किया जा रहा है, जिससे उनकी ऊर्जा और कौशल का प्रदेश के विकास के लिए पूरा उपयोग किया जा सके। योगी ने कहा कि पहली बार नलकूप चालकों की भर्ती में 516 महिलाओं का भी चयन हुआ है। सभी चयनित अभ्यर्थियों को एक माह का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गयी है।
इस अवसर पर उन्होंने कुल नवचयनित नलकूप चालकों को चयन एवं पदस्थापन का प्रमाण पत्र प्रदान किया। मुख् यमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिये विभिन् न जिलों में चयनित नलकूप चालकों से बात भी की और उनसे पूछा कि चयन और तैनाती प्रक्रिया के दौरान उन्हें किसी प्रकार के लेनदेन, सिफारिश या भेदभाव का सामना तो नहीं करना पड़ा। मुख्यमंत्री जी को सभी अभ्यर्थियों से नहीं में जवाब मिला।
पिछले 4 सालों में प्रदेश में इन पदों पर युवाओं को नौकरी मिली है:-
पुलिस विभाग – 1,37,253 नौकरियाँ
बेसिक शिक्षा – 1,21,000 नौकरियाँ
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन – 28,622 नौकरियाँ
यूपी लोक सेवा आयोग – 26,103 नौकरियाँ
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ चयन बोर्ड – 16,708 नौकरियाँ
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण – 8,556 नौकरियाँ
माध्यमिक शिक्षा विभाग – 1,400 नौकरियाँ
यूपीपीसीएल – 6,446 नौकरियाँ
उच्च शिक्षा – 4,615 नौकरियाँ
चिकित्सा शिक्षा विभाग – 1,112 नौकरियाँ
सहकारिता विभाग – 726 नौकरियाँ
नगर विकास – 700 नौकरियाँ
वित्त विभाग – 614 नौकरियाँ
तकनीकी शिक्षा – 365 नौकरियाँ
सीएम ने कैंडिडेट्स से बातचीत के दौरान कहा कि सभी 3209 नवचयनित अभ्यर्थियों को इस बात पर गर्व करना चाहिए कि उन्हें किसी सिफारिश या जुगाड़ से यह सरकारी नौकरी नहीं मिली है। यह नौकरी आपकी अपनी मेधा, क्षमता और मेहनत से मिली है। सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में नौकरी का एक मात्र आधार ‘मेरिट’ ही है।
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