तेल की बढ़ती कीमतों से जनता को कैसे मिलेगी राहत ?

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नई दिल्ली । तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर आम जन से लेकर सरकार तक हर कोई परेशान है। हालांकि, कई दिनों से तेल की कीमतों में कटौती हो रही है लेकिन पैसे-पैसे की कटौती ने अभी तक बमुश्किल एक रुपये की राहत लोगों को दी है। इसी बीच, मांग उठने लगी है कि तेल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए। जीएसटी के दायरे में लाने के लिए भी राज्यों की सहमति जरूरी है, लेकिन लगता है कि अब राज्य भी तेल के मामले को लेकर कोई खास राहत देने के मूड में नहीं हैं।

हाल ही में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि तेल की कीमतों को लेकर सरकार गंभीर और जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार कर रही है, बशर्ते सभी राज्य सहमत हों। इसी बीच खबर आई थी कि कुछ राज्य सहमत नहीं हैं। वहीं, इसी दौरान केरल ने तेल की कीमतों में एक रुपये की कटौती कर दी। लेकिन सभी राज्यों के साथ ऐसा नहीं लगता।

तेलंगाना के वित्तमंत्री इटाला राजेंद्र ने कहा कि शराब और पेट्रोल जीएसटी के दायरे में नहीं आने चाहिएं। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र ऐसा करता है, तो राज्य सरकारों को बहुत आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। वित्तमंत्री ने कहा कि 15वें वित्त आयोग की ओर से जारी कुछ निर्देशों से तेलंगाना सरकार सहमत नहीं है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने का फैसला सही नहीं है। यह फैसला संघीय ढांचे को प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने से राज्य सरकारों की आय और भी कम हो जाएगी। वित्त मंत्री ने कहा कि तेल और शराब जीएसटी के दायरे में नहीं लाए जाने चाहिएं। राज्यों को खुद से कुछ कमाई करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

केंद्र सरकार कम करे एक्साइज ड्यूटी
तेल की बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए वित्त मंत्री इटाला ने एक और तरीका सुझाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों से वैट कम करने को कहने की बजाय केंद्र सरकार को चाहिए कि वह एक्साइज ड्यूटी घटाए ताकि तेल के दाम कम हो सकें। उन्होंने कहा कि हम केंद्र से मांग करते हैं कि वो लगातार बढ़ रहे केंद्रीय टैक्स (सेंट्रल एक्साइज) को कम करे। इसके साथ ही वित्त मंत्री ने कहा कि आम आदमी को राहत देने की केंद्र सरकार की भी जिम्मेदारी है। बता दें कि तेल पर राज्य और केंद्र सरकार अलग- अलग कर लगाते हैं, जिसके बाद कीमत तय होती है।

क्यों नहीं चाहते राज्य ऐसा
बहुत से राज्य ऐसे हैं, जो कि तेल और शराब को जीएसटी के दायरे में लाने से इनकार कर सकते हैं। इसकी बड़ी वजह इन दोनों (तेल और शराब) से होने वाली राज्य सरकारों को कमाई है। राज्य सरकारों की आमदनी में सबसे बड़ा जरिया तेल और शराब पर लगने वाले भारी-भरकम टैक्स हैं। हालांकि राज्य सरकार की कमाई के अन्य साधन भी हैं लेकिन तेल और शराब के जरिए अरबों का राजस्व राज्य को मिलता है।

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