चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने करतारपुर कॉरिडोर को लेकर पाकिस्तान द्वारा वसूली जा रही 20 डॉलर प्रति यात्री की एंट्री फीस को ‘जजिया टैक्स’ करार दिया है। साथ ही मांग की है कि इस फीस को कम किया जाए। मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने अपनी कैबिनेट बैठक में यह बात कही। करतारपुर कॉरिडरो का महत्व देखते हुए यह बैटक डेरा बाबा नानक में रखी गई थी। यही वह स्थान है जहां से भारतीय नागरिक करतारपुर कॉरिडोर में प्रवेश करेंगे। पंजाब कैबिनेट की इस बैठक में करतारपुर कॉरिडोर के कामकाज की हुई समीक्षा। सीएम ने दूरबीन से गुरुदवारे के दर्शन भी किए।
क्या है जजिया टैक्स
जजिया टैक्स की शुरुआत औरंगजेब ने की थी। तब गैर-मुस्लिम देशों से यह टैक्स वसूला जाता था। बाद में सम्राट अकबर ने इस व्यवस्था को खत्म कर दिया था, लेकिन पाकिस्तान के कुछ हिस्सा में अब भी यह टैक्स वसूला जा रहा है। खासतौर पर पाकिस्तान की अफगान सीमा पर सिखों से जजिया कर वसूला जा रहा है।
9 नवंबर से खुलेगा, 11 को रवाना होगा पहला जत्था
पाकिस्तान ने 9 नवंबर से करतारपुर कॉरिडोर खोलने का ऐलान कर दिया है। वहीं भारत में भी पहले जत्थे को रवाना करने की तैयारियां जोरों पर हैं। जानकारी के मुताबिक, 11 नवंबर को इस कॉरिडोर से श्रद्धालुओं का पहला जत्था श्री करतारपुर साहिब के दर्शन के लिए रवाना होगा। 12 नवंबर को गुरु नानक देव की 550वीं जयंती है। उस उपलक्ष्य में सिख श्रद्धालु वहां दर्शन करेंगे।
क्या है 20 डॉलर फीस का मामला
भारत से करतापुर जाने वाले श्रद्धालुओं को सीमा पर एक स्लिप जारी की जाएगी, जिसकी फीस 20 डॉलर यानी करीब 14 रुपए तय की गई है। भारत के विरोध के बावजूद पाकिस्तान ने इतनी ज्यादा फीस तय की है। हर दिन 5000 यात्री जाएंगे यानी पाकिस्तान को हर महीने 72 लाख रुपए की कमाई होगी। यह स्लिप उसी दिन के लिए होगी और शाम तक श्रद्धालु को भारत वापस लौटना होगा।
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