हाइडराबाद में मौसमी बीमारियों का कहर: क्या है बचाव का उपाय?

हाइडराबाद में इस वर्ष मौसमी बीमारियों में हो रही भारी वृद्धि ने कई लोगों को परेशान कर रखा है। सितंबर के मध्य में 38 वर्षीय आईटी पेशेवर कीर्ति को तेज बुखार हुआ, जिससे उन्हें डेंगू या चिकनगुनिया की चिंता हुई। जांच में दोनों ही रोग नकारात्मक आने पर उन्हें राहत मिली, लेकिन बुखार दो दिनों में कम होने के बाद भी जोड़ों का दर्द दो हफ़्ते तक बना रहा। यह अनुभव शहर के कई अन्य लोगों का भी है। अगस्त और सितंबर में हाइडराबाद के निवासियों के लिए मौसमी बीमारियों का प्रकोप चरम पर रहा है। इस वर्ष इन बीमारियों के लक्षण पिछले वर्षों की तुलना में अधिक गंभीर और लंबे समय तक चलने वाले हैं।

हाइडराबाद में मौसमी बीमारियों का प्रकोप

लक्षणों की गंभीरता और अवधि में वृद्धि

हाइडराबाद में सामान्य चिकित्सक डॉ. पी. साकेता रेड्डी के अनुसार, इस वर्ष लोगों को शरीर के दर्द से उबरने में एक महीने से भी अधिक समय लग रहा है। यह एक असामान्य प्रवृत्ति है जो पिछले वर्षों में देखी नहीं गई थी। जोड़ों के दर्द के अलावा, कई लोगों को लगातार सूखी खांसी भी हो रही है। डॉ. रेड्डी ने वायरल बुखार के बढ़ते संक्रमण के बारे में चेतावनी दी है, साथ ही यह भी बताया है कि डेंगू और चिकनगुनिया जैसे मच्छर जनित रोग अभी भी एक महत्वपूर्ण खतरा हैं। मच्छरों के काटने से बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी गयी है।

सभी आयु वर्ग प्रभावित

यह प्रकोप सभी आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर रहा है। बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक सभी पीड़ित हैं। इससे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर भी दबाव पड़ रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

रोकथाम के उपाय

मच्छर जनित रोगों से बचाव के लिए मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करना अत्यंत आवश्यक है। घरों के आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए और मच्छरदानी का उपयोग करना चाहिए। मच्छर भगाने वाली क्रीम और मच्छर भगाने वाले उपकरणों का उपयोग भी फायदेमंद हो सकता है।

भारत में वेक्टर जनित रोगों में वृद्धि

मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया के मामले बढ़े

भारत में वर्ष 2024 में वेक्टर जनित रोगों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। देश में लगभग 12 लाख मलेरिया के मामले सामने आए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15% की वृद्धि है। अकेले हाइडराबाद में लगभग 30,000 डेंगू के मामले दर्ज किए गए हैं, जो 20% की वृद्धि दर्शाता है, जबकि चिकनगुनिया के मामले 15,000 हैं। शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और खराब स्वच्छता ने इस स्थिति को और बिगाड़ा है। हाइडराबाद में मानसून के मौसम ने मच्छरों की आबादी को बढ़ा दिया है, जिससे रोगों के संचरण का खतरा और बढ़ गया है।

संवेदनशील समूहों पर गंभीर प्रभाव

गर्भवती महिलाओं जैसे संवेदनशील समूहों के लिए, इन बीमारियों के परिणाम गंभीर हो सकते हैं। प्लेटलेट्स की गिनती में कमी और जोड़ों के दर्द जैसे लक्षण सांस लेने में तकलीफ और सदमे जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकते हैं, जिसके लिए अक्सर आईसीयू में भर्ती की आवश्यकता होती है। गर्भवती महिलाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाएं लेने से बचना चाहिए। लक्षणों के लगातार बने रहने पर उन्हें तुरंत चिकित्सा सलाह लेनी चाहिए।

कोविड-19 परीक्षण में कमी

लक्षणों में समानता और स्व-चिकित्सा से खतरा

कोविड-19 के लक्षण और मौसमी बीमारियों के लक्षणों में समानता होने के बावजूद कोविड-19 परीक्षण में काफी कमी आई है। लोगों को स्व-चिकित्सा से बचना चाहिए और चिकित्सा सलाह लेनी चाहिए। कोविड-19 परीक्षण में वृद्धि से मामलों की पहचान करने और लोगों को मास्क पहनने, हाथ धोने और सैनिटाइज करने जैसे निवारक उपायों की याद दिलाने में मदद मिल सकती है, जिन्हें अब कई लोग अनदेखा कर रहे हैं।

निष्कर्ष

हाइडराबाद में मौसमी बीमारियों के प्रकोप से पता चलता है कि रोगों की रोकथाम के लिए सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक है। स्वच्छता, मच्छर नियंत्रण और समय पर चिकित्सा सलाह लेना इन बीमारियों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लोगों को जागरूक होने और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए।

मुख्य बिन्दु:

  • हाइडराबाद में इस वर्ष मौसमी बीमारियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
  • लक्षण अधिक गंभीर और लंबे समय तक चलने वाले हैं।
  • सभी आयु वर्ग के लोग प्रभावित हो रहे हैं।
  • मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया के मामले बढ़े हैं।
  • कोविड-19 परीक्षण में कमी आई है।
  • स्व-चिकित्सा से बचना चाहिए और चिकित्सा सलाह लेनी चाहिए।
  • रोगों से बचाव के लिए सावधानी बरतना आवश्यक है।

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