New Delhi, आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिलने की वजह से तेलुगू देशम पार्टियां नाराज हो गई है। जिस कारण वो अब एनडीए से अलग हो गई है। और अब पार्टी ने केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला लिया है।
मोदी सरकार के खिलाफ ये पहला अविश्वास प्रस्ताव
क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव
अविश्वास प्रस्ताव विपक्षी दल के खिलाफ लाए जाने वाला प्रस्ताव है। जब दल को ऐसा लगता है कि सरकार के पास बहुमत नहीं है और वो संसद में अपना विश्वास खो चुकी है ऐसी स्थिति में पार्टी की तरफ से ये प्रस्ताव लाया जाता है। यह केवल लोकसभा में ही लाया जा सकता हैं राज्यसभा में नहीं।
अविश्वास प्रस्ताव को लाने की प्रकिया
अगर सदन में कोई दल अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहता है तो सबसे पहले दल को सभापति को इसकी लिखित सूचना देनी होती है। जिसके बाद सभापति उस दल के किसी सांसद से इस लिखित सूचना को पेश करने के लिए कहते हैं।
अविश्वास प्रस्ताव के लिए जरूरी है 50 सांसदों का समर्थन
अविश्वास प्रस्ताव को तभी स्वीकार किया जाता है जब प्रस्ताव को कम से कम 50 सांसदों का समर्थन हासिल होता है।इसके बाद सदन में इस प्रस्ताव की चर्चा हो सकती वोटिंग कराई जा सकती है या समर्थन करने वाले सांसदों को खड़ा कर उनकी गिनती की जाती हैं।
कैसे गिरती है सरकार
अविश्वास प्रस्ताव में अगर सरकार के विपक्ष में ज्यादा वोट पड़ गए, मतलब कि सदन में कुल मौजूद सदस्यों में से आधे से एक ज्यादा ने अगर सरकार के खिलाफ वोट हुआ तो, उस स्थिति में सरकार गिर जाती है।
कब आया पहला अविश्वास प्रस्ताव
संसद के इतिहास में पहली बार अगस्त 1963 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार के खिलाफ जे बी कृपलानी ने अविश्वास प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव के पक्ष में सिर्फ 62 वोट पड़े और विरोध में 347 वोट पड़े थे। तब से लेकर अबतक भारतीय राजनीति में 26 से ज्यादा बार अविश्वास प्रस्ताव रखे जा चुके हैं। लेकिन ज्यादातर प्रस्ताव सदन में गिरते आए हैं।
अविश्वास प्रस्ताव के कारण किसकि गिरी सरकार
पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की सरकार के 1978 में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव की वजह से गिर गई थी। हालांकि देसाई सरकार के खिलाफ 2 अविश्वास प्रस्ताव रखे गए थे, पहले प्रस्ताव से सरकार को कोई दिक्कत नहीं हुई, लेकिन दूसरे प्रस्ताव के वक्त घटक दलों ने साथ नहीं दिया था।
गौरतलब है कि अब तक सबसे ज्यादा 15 बार अविश्वास प्रस्ताव इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ लाए गए थे वहीं लाल बहादुर शास्त्री और नरसिंह राव सरकार को तीन-तीन बार ऐसे प्रस्ताव का सामना करना पड़ा था।
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