रांची में रच-बस गए थे सुशांत धोनी के किरदार में

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रांची। पटना के रहने वाले सुशांत सिंह बहुत कम समय में ही मायानगरी मुंबई में फिल्मी दुनिया की क्षितिज में छा गए। आज सुशांत इस दुनिया में भले नहीं हों, लेकिन जिस रांची शहर ने उन्हें क्षितिज पर छाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की, वहां की गलियों, मैदानों और स्टेडियम में सुशांत की महक अभी भी तरोताजा है।

सुशांत साल 2016 में अपनी फिल्म एमएस धोनी-द अनटोल्ड स्टोरी की शूटिंग करने के लिए झारखंड की राजधानी रांची पहुंचे थे और यहां के लेागों ने राजपूत की पहचान एमएस धौनी से जोड़ ली थी। यहां के लोग सुशांत को धौनी के रूप में ही देखने लगे थे।

ऐसे तो सुशांत ने कई धारावाहिकों, डांस कार्यक्रमों और फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर अपनी पहचान बनाई थी, लेकिन रांची वह शहर है, जिसने सुशांत के करियर को सबसे ज्यादा ऊंचाई दी थी। फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में सुशांत रांची के मैदानों, गलियों और स्टेडियम में पुहंचे थे। रांची में सुशांत भी कम दिनों में रच-बस गए थे।

धौनी की बायोपिक में एक गेंदबाज की भूिमका निभाने वाले नागेंद्र मिश्रा आईएएनएस से कहते हैं कि सुशांत बहुत मिलनसार थे। रांची में वे रच बस गए थे। रांची रेलवे के खिलाड़ी मिश्र कहते हैं कि फिल्म में सुशांत को बॉलिंग की है, और उनके साथ काफी समय गुजारा था।

वे कहते हैं कि सुशांत काफी कम समय में हमलोगों के अच्छे दोस्त बन गए थे। फिल्म निर्माण से पहले कई वषों तक धोनी से जुड़े पहलुओं, भाषा और रहन-सहन समझने के लिए वे रांची आते रहे। झारखंड के उन सभी शहरों और रांची के उन सभी मोहल्लों में भी पहुंचे जहां से धौनी का नाता था। धोनी के कोच से मिले, दोस्तों से मिले। धोनी के बारे में हर वो जानकारियां पता करने की कोशिश की, जो उनके फिल्म के लिए जरूरी था।

उनकी मेहनत और लगन की यह बानगी थी। यही कारण है कि दर्शकों ने सुशांत को धोनी के किरदार में एकदम से स्वीकार किया।

फिल्म के दौरान संदीपन भट्टाचार्य भी उनके साथ रहे थे। संदीपन उस समय प्रदेश अंडर 19 टीम में शामिल थे। भटटाचार्य आईएएनएस को बताते है कि सुशांत स्टेडियम पहुंचते थे और धोनी के बल्लेबाजी करने की बारीकियों को समझकर उनकी तरह बल्लेबाजी करने की कोशिश करते थे। भट्टाचार्य कहते हैं कि वे धोनी के हेलीकॉप्टर शॉट के लिए काफी मेहनत की थी।

सुशांत रांची में धोनी के कोच क़े आऱ बनर्जी से भी कई बार मिले थे और उनकी देखरेख में धोनी के हेलीकॉप्टर शॉट सीखी थी। कोच बनर्जी बताते हैं कि माही के दोस्त ही पहली बार मुझसे मिलाने के लिए सुशांत को घर लेकर आए थे। मुझे फिल्म जगत के बारे में कोई जानकारी नहीं है, लेकिन सुशांत जब मिले तो मेरे पैर छुए थे।

बनर्जी कहते हैं कि एक सफल खिलाड़ी की कॉपी करना बहुत आसान नहीं होता। बल्लेबाजी, विकेटकीपिंग कर उनके ही हाव-भाव में जीना आसान नहीं था, लेकिन सुशांत ने धोनी के किरदार को बखूबी जिया। वे कहते हैं कि फिल्म से पहले धोनी के बारे में जानने के लिए कई बार मिले और छोटी-छोटी बातें पूछीं।

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