कस्टम विभाग की कस्टडी में रखा सोना कैसे बना लोहा, पढ़िये पूरी खबर

मुंबई. आमतौर पर ठग लोहे को सोना बना देने का दावा करते हैं, पर कस्टम विभाग के कर्मचारियों ने इसका उलटा कर दिया. पुलिस रिकार्ड में दर्ज सोने को लोहा बना दिया गया था. 22 साल पहले कस्टम वालों ने मुंबई एयरपोर्ट पर किसी यात्री के पास से 100 ग्राम के सोने के 33 बिस्कुट जब्त किए थे. बाकायदा पंचनामा कर इन बिस्कुट को एक लिफाफे के अंदर रखा गया. लिफाफे में जब्ती की तारीख व अन्य जरूरी जानकारियां भी लिखी गईं. फिर उसे सील कर दूसरे लिफाफे में रखा गया. इस दूसरे लिफाफे को भी सील कर उसमें भी तमाम जानकारियां लिखी गईं. इसके बाद इन बिस्कुट को एयरपोर्ट के अंदर कस्टम विभाग के दफ्तर में बनी तिजोरी में रख दिया गया था.

नियम यह है, जिसके पास से ये बिस्कुट जब्त किए गए, यदि वह इन्हें वापस लौटाने के लिए मुकदमा दायर न करे, तो इनकी नीलामी कर दी जाती है. नीलामी के लिए कस्टम विभाग को अदालत से इजाजत लेनी पड़ती है. सन 1996 में कस्टम विभाग ने इन बिस्कुट की नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने के लिए जब तिजोरी में रखे लिफाफे को और फिर इस लिफाफे के भी अंदर वाले लिफाफे को खोला, तो उसमें सोने के बिस्कुट के बजाय लोहे के टुकड़े मिले. यह देख कस्टम अधिकारियों के होश उड़ गए. उन्होंने पुलिस में शिकायत की.

एक व्यक्ति आया शक के घेरे में
इसी में एक शक के घेरे में आ गया। पर पुलिस ने उसे तत्काल दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया नहीं, बल्कि उस पर नजर बनाए रखने का फैसला किया। इसी में पुलिस को पता चला कि वह नियमित एक डांस बार में जाता है और एक बार बाला पर रुपए लुटाता है। करीब एक पखवाड़े बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। जब उससे पूछताछ हुई, तो उसने कबूला कि उसने गिरफ्तारी से छह महीने पहले 33 सोने के बिस्कुट तिजोरी से चुराए थे।

कस्टम अधिकारी को दिया था धोखा

पकड़े गए आरोपी के अनुसार, कस्टम अधिकारी बहुत मस्तमौला था। वह अक्सर कैरम या ताश खेलने में मस्त रहता था और उसने तिजोरी की सुरक्षा का जिम्मा उसे ही सौंप रखा था। उसी में उसने तिजोरी में रखे सोने के बिस्कुट के लिफाफे के ऊपर क्या-क्या लिखा है, वह नोट कर लिया। फिर उसी तरह का एक लिफाफा खरीदा। उस पर बिल्कुल वही लिख दिया। उसमें लोहे के टुकड़े रखे। लोहे वाले इस लिफाफे को सील किया और फिर इसे तिजोरी में रखकर बिस्कुट वाला लिफाफा गायब कर दिया।

बिस्कुट चुराकर बेचा जूलर्स को
लिफाफे में रखे 33 बिस्कुट में से उसने 23 मुंबई के चार अलग-अलग जूलर्स को बेच दिए। बदले में मिली रकम को उसने बार बाला पर लुटा दिया। शेष 10 बिस्कुट उसने अपने एक दोस्त को एक बंद लिफाफे में बिना किसी भनक के दे दिए कि इसमें गोल्ड है, लेकिन दोस्त को कुछ शक हुआ। उसने एक दिन यह लिफाफा खोला और इसमें जब उसे सोने के बिस्कुट दिखे, तो वह लालच में आ गया। उसने इसमें से तीन बिस्कुट निकाले और इसे अपने गांव में चूल्हे के नीचे जमीन खोदकर छिपा दिए।

जब रमेश महाले व अन्य पुलिस + अधिकारियों द्वारा उससे पूछताछ के बाद उसके दोस्त का सुराग मिला, तो जांच टीम ने दोस्त के घर से वह लिफाफा जब्त कर लिया। पर लिफाफे में तीन बिस्कुट गायब पाकर सभी को लगा कि आरोपी झूठ बोल रहा है। लेकिन जब आरोपी बार-बार यह बोलता रहा कि उसने सिर्फ 23 ही बिस्कुट बेचे और दस बिस्कुट इस दोस्त को दिए थे, तब आरोपी के इस दोस्त से सख्ती से पूछताछ हुई। इसी में दोस्त ने तीन बिस्कुट गायब करने की बात करने की बात कबूली। उसके बाद चूल्हे की जमीन से ये तीन बिस्कुट निकाले गए। जिन जूलर्स को 23 बिस्कुट बेचे गए, उनसे भी इन्हें बरामद कर लिया गया। बाद में कस्टम विभाग को इन्हें वापस कर दिया गया।

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