एयर फेयर बढ़ा फेस्टिव सीजन के लिए, लेकिन रहेगा’लिमिट’ में

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अक्टूबर से शुरू होने वाले त्योहारी सीजन के लिए हवाई यात्रा के किराए इस महीने के मुकाबले बढ़ गए हैं। ये पिछले साल के त्योहारी सीजन के मुकाबले भी ज्यादा हैं। एयरलाइन और ट्रैवल कंपनियों के एग्जिक्यूटिव्स ने हालांकि कहा कि सैर-सपाटे से जुड़ी डिमांड में दिख रही सुस्ती के कारण एयर फेयर अप्रैल-जून तिमाही में दिखे ऊंचे स्तरों से कम ही रहेंगे। जेट एयरवेज का कामकाज ठप होने के कारण जून तिमाही में कपैसिटी घट गई थी और टिकटों के दाम उछल गए थे।

ट्रैवल पोर्टल क्लियरट्रिप के हेड (एयर ट्रैवल बिजनस) बालू रामचंद्रन ने कहा, ‘पिछले साल के मुकाबले इस बार त्योहारी सीजन यानी दिवाली और दशहरा के दौरान यात्रा के लिए करंट बुकिंग्स करीब 6 प्रतिशत ज्यादा हैं।’

मेकमायट्रिप के एक प्रवक्ता ने कहा कि पोर्टल के डेटा के अनुसार, दिवाली सीजन के लिए ट्रैवल बुकिंग्स और किराए में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिख रही है। हालांकि एयरलाइन एग्जिक्यूटिव्स ज्यादा उत्साहित नहीं दिखे। इसका मतलब यह है कि यात्रियों के लिए स्थिति अच्छी है क्योंकि यात्रा पर उनकी जेब ज्यादा ढीली नहीं होगी। एक सीनियर एयरलाइन एग्जक्यूटिव ने कहा, ‘किराए और लोड/बुकिंग्स में मुझे सीधा संबंध दिख रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘जिन्होंने किराए बढ़ाए हैं, उनकी बुकिंग्स घटी हैं। जिन्होंने किराए कम रख हैं, उनकी बुकिंग्स ज्यादा हो सकती हैं, लेकिन रेवेन्यू के लिहाज से ये ज्यादा नहीं हैं। जून तिमाही के मुकाबले रेवेन्यू ग्रोथ कमजोर ही दिख रही है।’

जेट का कामकाज 17 अप्रैल को बंद हुआ था। इससे सिस्टम से 500 से ज्यादा डेली फ्लाइट्स कम हो गई थीं। जून और जुलाई तक एयर फेयर पिछले साल से 25 प्रतिशत ज्यादा थे। यह ट्रेंड अगस्त तक बना रहा। उस समय तक एयरलाइंस को जेट एयरवेज के अधिकतर स्लॉट्स अस्थायी तौर पर दे दिए गए थे।

ओवरऑल नेगेटिव सेंटीमेंट के कारण देश में कन्जम्पशन घटा है। यह ट्रेंड खासतौर से ऑटोमोटिव सेक्टर में दिखा है। इसके एयर ट्रैवल इंडस्ट्री को भी चपेट में लेने का डर है, खासतौर से लीजर सेगमेंट में। एक लो-फेयर करियर के सीनियर एग्जिक्यूटिव ने कहा, ‘सितंबर में दिल्ली-मुंबई के लिए किराया 2500 रुपये है। इस एक महीने ने पिछले महीनों में हासिल बढ़त के अधिकांश हिस्से पर हाथ साफ कर दिया है। हम तो यही दुआ कर रहे हैं कि यील्ड्स के लिहाज से फेस्टिव सीजन बेहतर हो। हालांकि अभी तो हालात ऐसे नहीं दिख रहे हैं।

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