सख्त हुई सरकार, 108 इमरजेंसी सेवा के 3500 कर्मचारी बर्खास्त, सेवाएं ठप

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भोपाल, मध्यप्रदेश में इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा संचालित करने वाली कंपनी जिगित्सा ने प्रदेश में 108 इमरजेंसी सेवा के 3500 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है. कंपनी के ड्राइवर और पैरामेडिकल स्टाफ ने 8 घंटे से ज्यादा काम करने से मना कर दिया, जबकि कंपनी इनसे 12 घंटे से ज्यादा काम काम कराती थी. इसके बाद से प्रदेशभर में 108 इमरजेंसी सेवा लगभग ठप हो गई हैं. इधर डायरेक्टर आॅफ हेल्थ सर्विस का कहना है कि वैकल्पिक व्यवस्था कर ली गई है. सेवाओं में कोई गतिरोध नहीं आएगा.

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108 ambulence

इंदौर में 108 इमरजेंसी सेवा के 80 से ज्यादा कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है. जिससे शहर में 108 सेवा के पहिए पूरी तरह से थम गए हैं. एम्बुलेंस न मिलने से मरीजों को अस्पताल ले जाने में लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है. हालांकि कुछ जगह अप्रशिक्षित स्टॉफ से काम चलाया जा रहा है. इंदौर के बर्खास्त कर्मचारियों ने लेबर कमिश्नर से मिलकर सेवा बहाली की मांग की है. इमरजेंसी सेवा ठप होने से प्रदेशभर में स्थिति बिगड़ती जा रही है.

एंबुलेंस में काम करने के लिए कर्मचारियों की कम से कम तीन महीने की ट्रेनिंग होती है. ऐसे में ये सेवा जल्द बहाल होती दिखाई नहीं दे रही है. वहीं मानव अधिकार आयोग ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को नोटिस देकर इमरजेंसी सेवा बहाल करने के निर्देश दिए हैं.

इधर Directorate of Health Services Madhya Pradesh ने बताया है कि 108 एम्बुलेंस सेवा के ड्राइवर एवं EMT द्वारा 2 अप्रैल से मात्र दो शिफ्ट में कार्य करने व तीसरी शिफ्ट में एम्बुलेंस थाने में खड़ा किया जा रहा है. ड्राइवरों और EMT के हड़ताल की जानकारी NHM दी गई है. जिसके बाद NHM व जिगित्सा कंपनी द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था कर ली गई है .

NHM द्वारा जिलों में पदस्थ लगभग 1600 एमपीडबल्यू को ईएमटी का प्रशिक्षण दिया जा चुका है तथा आवश्यकतानुसार उन्हें एम्बुलेंस में कार्य करने हेतु नियुक्त किया जा रहा है . जिगित्सा कंपनी द्वारा भी एम्बुलेंस सेवा का चालन बाधित न हो इसको लेकर वैकल्पिक वाहन चालकों से एम्बुलेंस चलवाने की व्यवस्था की गई है .वर्तमान में अधिकांश 108 एम्बुलेंस क्षेत्र में वैकल्पिक व्यवस्था से सेवा प्रदान कर रही है . विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि आमजन को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो .

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