लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मंगलवार को आंधी-पानी ने भारी तबाही मचाई। सरकार के आंकड़ों के अनुसार इसमें अब तक 15 लोगों की मौत हुई है जबकि 13 घायल हुए हैं। छह मवेशियों की भी जान गई है। अवध के गोंडा जिले में तो ओलावृष्टि इतनी ज्यादा हुई कि कई स्थानों पर सड़कें सफेद चादर की तरफ ढंक गईं। आंचलिक विज्ञान केंद्र के निदेशक जेपी गुप्ता ने बताया है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में अगले 36 घंटों के बीच गरज-चमक के साथ तेज आंधी-पानी के आसार हैं।गोंडा में मंगलवार तड़के पांच बजे के करीब आए तूफान में कई लोगों के आशियाने ढह गए तो कई के छप्पर और टिनशेड उड़ गए।
आंधी-पानी के बीच वजीरगंज के गनेशपुर ग्रंट गांव में अमरेश पाल (15) और जानी (50) की पेड़ के नीचे दबकर मौत हो गई। वहीं, रायबरेली में तीन, कानपुर नगर में दो, उन्नाव में छह और पीलीभीत में भी दो लोगों की जान चली गई, जबकि कुल 13 लोग घायल हुए हैं।तूफान में सैकड़ों पेड़ धराशायी हो गए जबकि बिजली के कई खंभे भी क्षतिग्रस्त हो गए। इससे लगभग 50 गांवों की बिजली गुल हो गई है। नवाबगंज के कटरा-बस्ती राजमार्ग पर पेड़ गिरने से आवागमन पूरी से ठप हो गया है।
वन विभाग की टीम पेड़ों को हटाकर रास्ता खाली कराने मे जुटी है। ओलों की बारिश से गन्ना, तंबाकू व सब्जी की फसलों का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। नवाबगंज इलाके के जफरापुर, काजीपुर, बालापुर, कनकपुर, खड़ौआ, इस्माइलपुर, लोलपुर, बल्लीपुर, सानी सहित करीब 15 गांवों में आधी-पानी से करीब-करीब 20 लाख की सब्जी और गन्ने की फसल बर्बाद होने का अनुमान है।जफरापुर में पेड़ के नीचे दबने से एक अधेड़ रामकिशुन घायल हो गया, जबकि पेड़ के नीचे ही दबकर गांव के सुशील की एक गाय तथा रामगोपाल की भैंस पेड़ की मौत हो गई।
बल्लीपुर सानी गांव में ओलों की चपेट में आकर अनामिका और अमन घायल हुए हैं। बर्फ के ओलो से घायल हुयी है। गोंडा-बस्ती से सटे गांवों में भी ओलावृष्टि व आधी से भारी नुकसान हुआ है। अभी तक वन विभाग के अलावा किसी भी विभाग की टीमें राहतकार्य मे नहीं जुटी है न ही पीड़ितों को किसी तरह की मदद मिली है। आंधी-पानी से करीब पांच लाख की आबादी प्रभावित हुई है।उधर, पृथ्वीनाथ मंदिर परिसर में पेड़ गिरने से तीन लोगों के दुकानों को नुकसान हुआ है। पेड़ों के गिरने से गोंडा-फैजाबाद मार्ग पर कई घंटे वाहनों की कतार लगी रही। कटरा-किशुनदासपुर मार्ग पर भी घंटों जाम लगा रहा।
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