दिल्ली कूच: किसानों का 300वाँ दिन, आंदोलन जारी
किसानों का दिल्ली कूच का ऐलान! शंभू बॉर्डर से 300वें दिन फिर दिल्ली की ओर बढ़ेंगे किसान, जानें पूरी कहानी और क्या है किसानों की मांग?
लगातार 299 दिनों से जारी किसान आंदोलन ने अब नया मोड़ ले लिया है। शंभू बॉर्डर पर डेरा डाले किसानों ने दिल्ली कूच की घोषणा कर दी है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर के अनुसार, 8 दिसंबर को 101 किसानों का एक जत्था शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली की ओर कूच करेगा। लेकिन सरकार ने किसानों को रोकने की पूरी तैयारी कर ली है।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग
किसानों के दिल्ली कूच के ऐलान के बाद हरियाणा और दिल्ली पुलिस ने सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। शंभू बॉर्डर पर कील के पैटर्न वाले बैरियर और ब्रेकर लगाए जा रहे हैं। सरकार की तरफ से किसानों को रोकने की पूरी तैयारी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है कि कैसे कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, ताकि किसानों को बॉर्डर पार करने से रोका जा सके। यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने किसानों के मार्च को रोकने की कोशिश की है। इससे पहले भी किसानों ने दिल्ली कूच की कोशिश की थी, लेकिन हरियाणा पुलिस ने उन्हें रोक दिया था।
16 किसान घायल
शुक्रवार को शंभू बॉर्डर पर किसानों और हरियाणा पुलिस के बीच झड़प हुई थी, जिसमें 16 किसान घायल हुए थे। एक किसान की सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार बातचीत करने के मूड में नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि चार गंभीर रूप से घायल किसानों को छोड़कर बाकी को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है।
सरकार की तैयारी और किसानों का संकल्प
किसानों के दिल्ली कूच को रोकने के लिए हरियाणा पुलिस ने पूरी तैयारी कर ली है। हरियाणा के डीजीपी ने पंजाब के डीजीपी को एक पत्र लिखकर मीडिया कर्मियों को प्रदर्शन स्थल से कम से कम 1 किमी की दूरी पर रखने का अनुरोध किया है ताकि सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, हरियाणा सरकार ने अंबाला जिले के 11 गांवों में 9 दिसंबर तक मोबाइल इंटरनेट और एसएमएस सेवाएं निलंबित कर दी हैं।
सरकार का रवैया
किसानों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों पर बातचीत करने को तैयार नहीं है। सरकार का रवैया किसानों के आंदोलन को लेकर कठोर है, और वह हर संभव प्रयास कर रही है ताकि किसानों के प्रदर्शन को रोक सके।
किसानों की मांगें
किसानों की मुख्य मांगें हैं: न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का कानूनी गारंटी, कृषि कानूनों को निरस्त करना और बिजली अधिनियम में संशोधन। किसान अपनी इन मांगों को लेकर पिछले 299 दिनों से संघर्ष कर रहे हैं।
क्या आगे बढ़ेगा आंदोलन?
किसानों के दिल्ली कूच का यह आंदोलन आगे कैसे बढ़ेगा, यह देखना बाकी है। लेकिन यह स्पष्ट है कि किसान अपनी मांगों को लेकर लगातार संघर्ष जारी रखेंगे।
टेक अवे पॉइंट्स
- किसान 8 दिसंबर को 300वें दिन शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली कूच करेंगे।
- सरकार ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है, बैरिकेडिंग की गई है।
- शुक्रवार को हुई झड़प में 16 किसान घायल हुए।
- किसान अपनी मांगों को लेकर लगातार संघर्ष जारी रखेंगे।

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