उन्नाव रेप केस: DGP ने बताया, क्यों नहीं थे पुलिसकर्मी पीड़िता के साथ

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उत्तर प्रदेश के रायबरेली में रविवार को एक बेकाबू ट्रक ने एक कार को टक्कर मार दी, जिसमें उन्नाव दुष्कर्म मामले की पीड़िता, उसके रिश्तेदार और वकील बैठे हुए थे। हादसे में पीड़िता की चाची समेत दो की मौत हो गई, जबकि पीड़िता और वकील गंभीर रूप से जख्मी हो गए। वहीं उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओ.पी. सिंह ने कहा है कि उन्नाव रेप पीड़िता की सुरक्षा में कोई लापरवाही नहीं की गई है। उसके वाहन में जगह की कमी होने के कारण उसी ने सुरक्षाकर्मी से आग्रह किया था कि वह रायबरेली तक उसके साथ नहीं चलें।

डीजीपी ने कहा कि हम एक निष्पक्ष जांच करेंगे। प्राथमिक जांच से पता चलता है कि यह हादसा ट्रक के ओवरस्पीड में होने के चलते हुआ। ट्रक ड्राइवर और मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है। यदि परिवार मामले की सीबीआई जांच की मांग करता है, तो हम मामले को सीबीआई को सौंप देंगे।

पीड़िता के रिश्तेदारों ने भाजपा विधायक पर आरोप लगाया है कि रेप का आरोप लगाने के बाद मुकदमे की जोरदार पैरवी में जुटी रही पीड़िता और उसके चाचा पर समझौता करने का दबाव बहुत बनाया गया। जाने कितनी बार रेप पीड़िता के घर विधायक के गुर्गे धमकाने गये लेकिन कोई झुका नहीं। अब जब ट्रॉयल चल रहा है तो तो विधायक के लोगों ने साजिश के तहत पीड़िता पर इस तरह से हमला कराया। इन रिश्तेदारों ने कहा कि पिछले साल अगर पीड़िता ने मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह की कोशिश न की होती तो शायद आरोपी अभी तक बाहर ही होते। विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर ने जिस तरह से दबंगई दिखाते हुए पीड़िता के पिता की पिटाई की थी, फिर पुलिस से साठगांठ कर उन्हें ही जेल भिजवा दिया था। यह उसकी दबंगई का नमूना ही था।

ट्रक की नम्बर प्लेट पर पेंट क्यों था
जिस ट्रक ने कार में टक्कर मारी, उस पर पूरा नम्बर नहीं लिखा हुआ था। नम्बर प्लेट पर सिर्फ यूपी 71 ही लिखा था और प्लेट के अन्य हिस्से पर काला पेंट किया हुआ था। इससे नम्बर नहीं दिख रहा था। इस पर ही रिश्तेदारों ने आरोप लगाया कि यह साजिश के तहत ही प्लेट पर काला पेंट किया गया ताकि अगर ड्राइवर ट्रक लेकर भाग निकलता तो पकड़ में ही नहीं आता।

ड्राइवर पहले गया, फिर क्यों लौटा
रायबरेली पुलिस ने उन्नाव पुलिस को यह भी जानकारी दी कि ट्रक का ड्राइवर आशीष पाल पहले मौके से भाग निकला था। पर, बाद में वह घटनास्थल पर फिर आया। तभी लोगों ने उसे पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने जब ड्राइवरी से इस बारे में पूछा तो उसने संतोष जनक जवाब नहीं दिया। आईजी एसके भगत का कहना है कि रायबरेली एसपी से कहा गया है कि वह हर बिन्दु पर ठीक से जांच कर अपनी रिपोर्ट दें।

यह था मामला
उन्नाव से भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर उन्नाव की एक किशोरी ने रेप का आरोप लगाया था। इस मामले में पीड़िता ने आरोपी विधायक के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से नाराज होकर मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह की कोशिश की थी। इसके दो दिन बाद ही विधायक के भाई अतुल सिंह की पिटाई से घायल पीड़िता के पिता की उन्नाव जेल में मौत हो गई थी। इस मामले में भी पुलिस दबाव में कोई कार्रवाई नहीं कर रही थी। पर, पीड़िता के पिता की मौत के बाद इस मामले ने इस तरह से तूल पकड़ा कि राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया। इसके बाद आनन फानन सरकार सख्त हो गई और विधायक के भाई अतुल सिंह व उसके गुर्गों को गिरफ्तार कर लिया गया। अतुल ने ही माखी थाने की पुलिस से साठगांठ कर पिता को पीटा भी था और फिर उन्हें ही फर्जी मामले में जेल भिजवा दिया था। इस मामले में चारों से घिरने के बाद सरकार को सीबीआई जांच की सिफारिश करने पर मजबूर होना पड़ा। आनन फानन इसकी जांच सीबीआई को दी गई। सीबीआई ने मुकदमा दर्ज करते ही विधायक को गिरफ्तार कर लिया था। इसमें सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी लगा दी थी।

इन दो मुकदमों में लगी चार्जशीट
-पहला मुकदमा
पीड़िता की मां की ओर से माखी गांव की शशि सिंह, विधायक कुलदीप सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 504, 506 के तहत दर्ज एफआईआर
-दूसरा मुकदमा
पीड़िता की मां की ओर से माखी गांव के विनीत मिश्र, बौव्वा, शैलू, सोनू व अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 363, 366, 376,506 और पोक्सो एक्ट-3, 4 के तहत एफआईआर

कब क्या-क्या हुआ
– आठ अप्रैल, 2018-पीड़िता ने विधायक के खिलाफ कार्रवाई के लिये सीएम आवास के सामने आत्मदाह का प्रयास किया
– नौ अप्रैल, 2018-पिता की जेल में मौत के बाद विधायक के भाई व गुर्गे गिरफ्तार
– 10 अप्रैल, 2018-पिता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर 14 चोटें बतायी गई
– 11 अप्रैल, 2018-सरकार ने सीबीआई जांच के आदेश दिये
– 12 अप्रैल, 2018-सीबीआई ने विधायक के खिलाफ दर्ज की एफआईआर
– 13 अप्रैल, 2018-सीबीआई ने विधायक को गिरफ्तार किया

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