पीलीभीत हजारो किमी का सफर तय करके ठंडे देशों से अपने वतन को वापिस लौटने लगे साइबेरियन पक्षी

पीलीभीत हजारो किमी का सफर तय करके ठंडे देशों से अपने वतन को वापिस लौटने लगे साइबेरियन पक्षी

रिपोर्ट ज़ाहिद अली

पीलीभीत: पूरनपुर ठंडे देशों से हजारों किलोमीटर का लम्बा सफर तय कर यहाँ आने वाले प्रवासी पक्षी अब अपने वतन को लौटने लगे हैं। तराई के जलाशयों को अपनी रंग बिरंगी छटा से तीन महीने तक गुलजार रखने वाले इन प्रवासी पक्षियों की वन विभाग ने न केवल आवभगत की बल्कि उनकी सुरक्षा का भी पूरा ख्याल रखा। शारदा सागर ड्राम,शारदा बैराज से प्रवासी पक्षियों की विदाई शुरू हो गई है। *विकार हसन खां* (विक्की) ने बताया विश्व के विभिन्न ठंडे देशों से लाखों की संख्या में विदेशी पक्षी हजारों किलोमीटर लम्बा और थकाऊ सफर तय कर हिमालय की तलहटी में पहुँचते हैं। प्रवासी पक्षियों के यहाँ पहुँचने का समय दिसम्बर व जनवरी महीने का होता है।

उस समय इन पक्षियों के मूल देश में भीषण ठंड पड़ती है जबकि यहाँ जलवायुअपेक्षाकृत शीतोष्ण होती है।चीन व आसपास के अन्य ठंडे देशों के अलावा यूरोशिया के विभिन्न देशों से विभिन्न प्रजातियों के पक्षी यहाँ आते हैं जिनमें ग्रे लैग गीज, पिन टेल, कामन टेल, रेड क्रेस्टेड, पोचार्ड, व्हाइट आइड पोचार्ड, विजन, गैडबाल, शावलर, पेलिकिन व साइबेरियन क्रेन आदि पक्षी शामिल हैं। ठंडे देशों से जुलाई अगस्त महीने में पक्षी भारत व नेपाल के लिए रवाना होते हैं। ये तीन महीने की उड़ान भरकर यहाँ पहुँचते हैं। अपने सफर के दौरान यह पक्षी कई जगह पड़ाव भी करते हैं। बार हेडेड जैसे पक्षी लद्दाख में पड़ाव कर अंडे भी देते हैं। इन पक्षियों का मार्ग निर्धारित होता है। पक्षी मार्ग निर्धारण आपसी सहमति से करते हैं। पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि पक्षियों के बीच जबरदस्त संवाद होता है। पक्षी हजारों के झुंड में उड़ान भरते हैं। ये पक्षी जहाँ अपना पड़ाव करते हैं, दूसरे झुंड के आने के पहले वह पड़ाव छोड़ देते हैं।

पक्षियों की वापसी मार्च के पहलेसप्ताह से शुरू हो जाती है। जनवरी से मार्च तक वन विभाग के सामने इन पक्षियों की सुरक्षा और देखभाल की कड़ी चुनौती होती है। शिकारियों से इन पक्षियों को बचाने के लिए जलाशयों की निगरानी की जाती है। साथ ही पक्षियों को जलाशयों पर प्राकृतिक आवास व उनके स्वाभाविक भोजन की व्यवस्था बनाए रखना भी वन विभाग की जिम्मेदारी होती है। इस दौरान पक्षी विशेषज्ञ भी पक्षियों की गतिविधियों का अध्ययन करने के लिए यहाँ जुटते हैं। विक्की हसन ने बताया मार्च का महीना शुरू होते ही प्रवासी पक्षियों की अपने देशों को वापसी शुरू हो गई है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में यह पक्षी उड़ान भर रहे हैं। उड़ान भरते हुए पक्षियों की वापसी का नजारा लोगों का खूब लुभा रहा है। यह पक्षी करीब तीन साढ़े तीन महीने उड़ान भर कर अपने देशों में पहुँचते हैं। विक्की ने इन पक्षियों को अपने कैमरे कैद किया है।

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