राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही भाजपा सरकार लगातार गहलोत सरकार की योजनाओं के नाम बदलने में लगी हुई है। इस कदम से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और आम जनता के बीच बहस छिड़ गई है। एक तरफ जहां सरकार का कहना है कि यह बदलाव विकास और पारदर्शिता के लिए जरूरी हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इस कदम को राजनीतिक प्रतिशोध की संज्ञा दे रहा है। आइए, विस्तार से जानते हैं किन योजनाओं के नाम बदले गए हैं और इसके पीछे की क्या वजहें हैं।
इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना का नाम बदलकर मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारंटी योजना
गहलोत सरकार द्वारा शुरू की गई ‘इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना’ का नाम बदलकर अब ‘मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारंटी योजना’ कर दिया गया है। यह योजना शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारों को 100 दिन का रोजगार प्रदान करती है। इस योजना के नाम परिवर्तन पर काफी विवाद हुआ है, कई लोग इसे राजनीतिक प्रेरित बता रहे हैं। नाम बदलने के पीछे सरकार का तर्क यह है कि इस तरह से योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी होगा और योजना का लाभ अधिक लोगों तक पहुँचेगा। हालांकि, विपक्ष का मानना है कि इस तरह के बदलाव योजनाओं के क्रियान्वयन की गति को धीमा करते हैं और आम जनता के साथ छलावा करते हैं।
योजना का उद्देश्य और क्रियान्वयन
इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में गरीबी और बेरोजगारी को कम करना है। यह योजना मनरेगा की तर्ज पर बनाई गई है जो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करती है। इस योजना में पात्र लाभार्थियों को रोजगार कार्ड जारी किए जाते हैं, और उन्हें 100 दिन का रोजगार देने का प्रावधान है।
क्या बदले नाम से योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव है?
योजनाओं के नाम परिवर्तन से संबंधित एक बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या नाम परिवर्तन से योजनाओं का क्रियान्वयन और प्रभावी हो जाएगा? हालांकि सरकार का मानना है कि इससे योजनाएँ बेहतर तरीके से चलाई जा सकेंगी और लोगों को अधिक लाभ पहुँचेगा, लेकिन यह सब कुछ प्रक्रियागत बदलाव पर निर्भर करता है। क्या केवल नाम परिवर्तन से यह सब संभव हो पाएगा यह देखने वाली बात है।
अन्य योजनाओं के नाम परिवर्तन
‘इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना’ के अलावा भी कई अन्य योजनाओं के नाम बदल दिए गए हैं। इनमें ‘इंदिरा रसोई योजना’ का नाम बदलकर ‘अन्नपूर्णा रसोई योजना’ और ‘चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना’ का नाम बदलकर ‘मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना’ किया गया है। इसी प्रकार, ‘मुख्यमंत्री बाल गोपाल योजना’ का नाम बदलकर ‘पन्नाधाय बाल गोपाल योजना’ और ‘राजीव गांधी जल स्वावलंबन योजना’ का नाम बदलकर ‘मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना’ कर दिया गया है। तीन महिला केंद्रित योजनाओं, ‘इंदिरा महिला शक्ति उड़ान योजना’, ‘इंदिरा महिला शक्ति जागरूकता शिक्षा कार्यक्रम’, और ‘इंदिरा महिला एवं बाल विकास शोध संस्थान योजना’ को मिलाकर एक नई योजना ‘कालीबाई भील संबल योजना’ बनाई गई है।
क्या है इन परिवर्तनों के पीछे की वजह?
सरकार का कहना है कि ये बदलाव बेहतर क्रियान्वयन और पारदर्शिता के लिए जरूरी हैं, परन्तु कई लोगों का यह भी मानना है कि यह एक राजनीतिक कदम है। चाहे कारण कुछ भी हो, इस कदम से आम जनता के बीच मतभेद पैदा हुए हैं।
क्या यह बदलाव सही हैं?
योजनाओं के नाम बदलने का विवाद इस बात पर निर्भर करता है कि आप किन मानकों पर इस बदलाव को देखते हैं। यदि आप सुशासन और प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हैं, तो यह एक सकारात्मक कदम हो सकता है, परन्तु राजनीतिक दृष्टिकोण से इसे आलोचनात्मक रूप से देखा जाता है।
Take Away Points
- राजस्थान सरकार ने कई योजनाओं के नाम बदल दिए हैं जिनमें से कुछ मुख्य हैं ‘इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना’, ‘इंदिरा रसोई योजना’, ‘चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना’ इत्यादि।
- सरकार का तर्क है कि इन परिवर्तनों से योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर होगा, लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक बदलाव मान रहा है।
- इस मुद्दे पर जनता की राय अलग-अलग है, कुछ लोगों का कहना है कि इन बदलावों से योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा, जबकि अन्य लोग इस परिवर्तन को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हैं।

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