योगी आदित्यनाथ: आरएसएस के नए प्रियपात्र और हिंदुत्व का भविष्य?

योगी आदित्यनाथ: आरएसएस के नए प्रियपात्र और हिंदुत्व का भविष्य?

क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आजकल आरएसएस के सबसे चहेते नेता बन गए हैं? जी हाँ, आपने सही सुना! हाल ही में मथुरा में हुई आरएसएस की बैठक में योगी जी ने ऐसा जादू चलाया कि सबकी निगाहें उन पर ही टिक गईं। क्या है इस राज का खुलासा? इस लेख में हम जानेंगे कैसे योगी जी ने आरएसएस के दिलों में अपनी जगह बनाई और कैसे वे हिंदुत्व के भविष्य के रूप में उभर रहे हैं।

कुंभ मेले में शामिल होंगे पिछड़े और अन्य हिंदू समुदाय

योगी जी ने आरएसएस के नेताओं से मुलाकात में एक अहम प्रस्ताव रखा – कुंभ मेले में पिछड़े और अन्य हिंदू समुदायों को शामिल करना। यह विचार इतना शानदार है कि इससे हिंदू समाज में एक नई ऊर्जा का संचार होगा। लिंगायत, आदिवासी, और अन्य समुदाय जो पहले कुंभ से दूर रहे, अब उन तक पहुँच बनाना योगी जी की प्राथमिकता है। यह एक ऐसा कदम है जो सामाजिक समरसता को बढ़ावा देगा और कुंभ मेले को और भी भव्य बनाएगा। सोचिए, कितना बड़ा बदलाव होगा! अगले साल प्रयागराज में होने वाले कुंभ में क्या होगा? इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यह योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व का एक और उदाहरण है जो सामाजिक समरसता की दिशा में बढ़ता हुआ दिखाई देता है।

आरएसएस का पूरा समर्थन

इस योजना को आरएसएस का पूरा समर्थन मिला है। उनका कहना है कि लिंगायत, करवी, और केरल के कुछ समुदायों को कुंभ में शामिल करना एक महत्वपूर्ण कदम है। पहले कभी ऐसा प्रयास नहीं किया गया। लेकिन योगी जी की पहल से यह संभव हो पाएगा और इससे हिंदू समाज में एकता बढ़ेगी, साथ ही कुंभ मेला एक नया आयाम पाएगा। यह समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने का एक बहुत ही कारगर उपाय लग रहा है, क्या आपको नहीं लगता?

योगी-आरएसएस की अद्भुत केमिस्ट्री

योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है। देशभर में उन्हें भाषण देने के लिए बुलाया जाता है और उनकी कार्यशैली की खूब तारीफ होती है। अब आरएसएस ने भी उनकी कार्यशैली पर मुहर लगा दी है। योगी जी का आरएसएस के साथ बढ़ता तालमेल दिखाता है कि वे अब संघ के सबसे पसंदीदा नेता बन गए हैं। यह उनके राजनीतिक कौशल और उनके दूरदर्शी सोच का एक शानदार प्रदर्शन है।

45 मिनट की गुप्त बैठक

मथुरा बैठक में आरएसएस के नेताओं के साथ योगी जी की 45 मिनट की गुप्त बैठक भी इसी बात का सबूत है। यह बैठक दोनों के बीच गहरे संबंधों का प्रतीक है। इससे यह पता चलता है कि योगी जी अब संघ के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। दोनों संस्थाओं के मिलकर काम करने से देश के लिए क्या अच्छा होगा, सोचिये?

योगी: हिंदुत्व का भविष्य?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं ने योगी जी को

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