आज क्या ड्रीम बजट पेश करेंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, यहां जानें क्या ड्रीम बजट

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार आज अपना बजट पेश करने जा रही है। कई बार आर्थिक सर्वे भविष्य के बारे में बता जाते हैं। इसी तरह 2020 केआर्थिक सर्वे में आर्थिक सुस्ती और विकास की धीमी रफ्तार का जिक्र किया गया है। इसमें निदान की ओर भी संकेत किए गए हैं। सर्वे के अनुसार, इकॉनमी की चाल बढ़ाने के लिए स्पेंडिंग का बूस्टर डोज देने की आवश्यकता है। इसमें ऐसे उपाय किए जाए जिसमें आम आदमी भी खर्च करने से नहीं हिचके। इस लिहाज से निगाहें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हैं। आखिर वो 2020-21 के बजट में ऐसी क्या सौगात देती हैं जिससे खरीदारी और निवेश बढ़े। वित्त मंत्री अगर इस पर फोकस करती हैं तो यह भारत का दूसरा ड्रीम बजट साबित हो जाएगा।

इससे पहले 1997-98 के बजट को ड्रीम बजट कहा जाता है , जानिए क्यों…

 

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1997-98 के बजट को ड्रीम बजट कहा जाता है। इसे एचडी देवगौड़ा सरकार में वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने पेश किया था। इस बजट में आयकर की ऊपरी सीमा 40 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत कर दी थी। सरकारी कंपनियों के निजीकरण का रास्ता खोल दिया था। अचानक आयकर कलेक्शन में तेजी आई और सैलरी वालों ने टैक्स से बचे पैसे को वाहन, फ्लैट, प्लॉट खरीदने में लगा दिया। निवेश के दूसरे साधनों में पैसे लगे। इकॉनमी ऐक्टिव हुई और मैनुफैक्चरिंग बढ़ी। एक ऐसा चक्र बना जिसने विकास दर को पंख लग गए।


आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने, घाटे पर लगाम लगाने की चुनौती

तब भारत 1991 के आर्थिक संकट से बाहर निकल गया। जीडीपी 5 फीसदी के आस-पास थी। आज हम उसी मोड़ पर हैं। विकास दर 10 फीसदी को छूकर पुराने पांच फीसदी के आंकड़े पर आ गई है। बेरोजगारी 40 वर्षों के सर्वोच्च स्तर पर है। ऐसे में वित्त मंत्री के सामने ऐसा बजट पेश करने की चुनौती है जो न सिर्फ सुस्त रफ्तार पर एक्सलेटर लगाए बल्कि घाटा भी पाटे।

दूसरी ओर वित्त मंत्री इसे नजरअंदाज कर ऐसे आर्थिक सुधारों को हवा दे सकती हैं जिससे रोजगार पैदा हों, बैंकिंग सिस्टम में लोगों का भरोसा मजबूत हो और सैलरी वालों की बचत बढ़े। इसके संकेत निर्मला सीतारमण सितंबर में ही दे चुकी हैं। तब कॉर्पोरेट टैक्स में भारी कटौती की गई। मौजूदा कंपनियों का टैक्स 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दिया गया। नवंबर-दिसंबर के आंकड़े बताते हैं कि सुस्ती थोड़ी दूर हुई है।

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