रिपोर्ट:सैय्यद मकसूदुल हसन/हर्ष यादव
मुसाफिरखाना(अमेठी)। बिना भाव के भगवान कीमती चीजों को भी ग्रहण नहीं करते। यदि भाव से एक फूल ही चढ़ा दें तो प्रभु प्रसन्न हो जाते हैं। जिस व्यक्ति में ईश्वर प्रेम का भाव पैदा हो जाए तो उसे ईश्वर की लगन लगी रहती है। यह बाते गुरुवार को दशरथ महाराज के सानिध्य में रेलवे स्टेशन निकट चल रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिवस कथावाचक डॉ. विनय शास्त्री ने कही।
कथा वाचक श्री शास्त्री ने कहा कि जीव परमात्मा का अंश है इसलिए जीव के अंदर अपार शक्ति रहती है। यदि कोई कमी रहती है वह मात्र संकल्प की होती है। संकल्प दृढ़ एवं कपट रहित होने से प्रभु उसे निश्चित रूप से पूरा करेंगे। उन्होंने महारासलीला, श्री उद्धव चरित्र, श्री कृष्ण मथुरा गमन और श्री रुक्मिणी विवाह महोत्सव प्रसंगों पर विस्तृत विवरण दिया।
श्री रुक्मिणी विवाह महोत्सव प्रसंग पर व्याख्यान करते हुए उन्होंने कहा कि रुक्मिणी के भाई रुक्मि ने उनका विवाह शिशुपाल के साथ निश्चित किया था, लेकिन रुक्मिणी ने संकल्प लिया था कि वह शिशुपाल को नहीं केवल गोपाल को पति के रूप में वरण करेंगी। उन्होंने कहा कि शिशुपाल असत्य मार्गी है और द्वारकाधीश भगवान श्री कृष्ण सत्यमार्गी इसलिए मै असत्य को नहीं सत्य को अपनाऊंगी। अत: भगवान श्री द्वारकाधीश जी ने रुक्मिणी के सत्य संकल्प को पूर्ण किया और उन्हें पत्नी के रूप में वरण करके प्रधान पटरानी का स्थान दिया। रुक्मिणी विवाह प्रसंग पर आगे कथा वाचक ने कहा कि इस प्रसंग को श्रद्धा के साथ श्रवण करने से कन्याओं को अच्छे घर और वर की प्राप्ति होती है और दांपत्य जीवन सुखद रहता है। इस पावन प्रसंग के दौरान दान की विशेष महिमा है।
अंत मे एडवोकेट जयबख्श सिंह सपरिवार व्यास पीएठ की आरती उतारी।
इस मौके पर एडवोकेट सुधाकर सिंह,प्रभाकर सिंह,प्रदीप सिंह थौरी,मोहित गुप्ता,जीत बहादुर सिंह,आनंद सिंह,हर्ष यादव,हनुमान जायसवाल बीडीसी, सुंदरलाल त्रिपाठी सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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