इटावा। सैफई में आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय स्थापित है, जिसे मिनी पीजीआई भी कहा जाता है। यहां मेडिकल की पढ़ाई होती है। सत्र प्रारंभ हो गया है। मंगलवार को यहां एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र अलग ही अंदाज में नजर आए। सभी छात्रों के सिर मुंडवा दिया गया था। एक लाइन में चलते हुए छात्र अपनी क्लास में पहुंचे। इस दौरान उनके सिर झुके हुए थे।
इसके साथ ही हॉस्टल की तरफ जाते समय निश्चित दूरी पर झुककर हाथों से प्रणाम करते हुए भी नजर आए। इटावा के सैफई मेडिकल विश्वविद्यालय में 100 से अधिक मेडिकल छात्रों के सिर मुंडवा दिए गए। हॉस्टल से कक्षा और कैंटीन तक उन्हें सिर झुकाकर जाना पड़ता है। परिसर से निकलकर रैगिंग की चर्चा शासन तक पहुंची तो खलबली मच गई। मंगलवार शाम को सैफई पुलिस और यूनिवर्सिटी के कुलपति ने छात्रों से पूछताछ की, लेकिन किसी ने शिकायत नहीं की।
सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के गांव सैफई में बने मेडिकल विश्वविद्यालय में रैगिंग का मामला सामने आया है। एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे सभी 150 छात्रों के सिर मुंडवा दिए गए हैं। जब वे अपनी क्लास में आते हैं तो उन्हें सिर झुकाकर चलना होता है। साथ ही हॉस्टल की तरफ दूर से ही झुककर प्रणाम करते हैं।
सैफई में बने मेडिकल विश्वविद्यालय में एमबीबीएस और एमएस, एमडी, पैरामेडिकल आदि की पढ़ाई होती है। इस मेडिकल कॉलेज में एक हजार से अधिक छात्र-छात्राएं हैं। मेडिकल विश्वविद्यालय में करीब 150 छात्र-छात्राएं एमबीबीएस कर रहे हैं। इसमें 100 से अधिक छात्र हैं। मंगलवार को एमबीबीएस के छात्रों के साथ रैगिंग की चर्चा चिकित्सा विश्वविद्यालय से बाहर निकल आई। कुछ ही देर में मामला शासन तक पहुंच गया, तो चिकित्सा शिक्षामंत्री आशुतोष टंडन ने विश्वविद्यालय के कुलपति राजकुमार से जवाब तलब कर लिया।
पुलिस और कुलपति ने एमबीबीएस के सभी छात्रों से रैगिंग के संबंध में पूछताछ की, लेकिन किसी भी छात्र ने पुलिस और कुलपति से शिकायत नहीं की। सूत्रों के अनुसार विश्वविद्यालय में रैगिंग की शिकायत छात्रों ने ही बाहर तक पहुंचाई। अब वे सीनियर छात्रों के डर और अपने करियर की चिंता के कारण मुंह नहीं खोल रहे हैं। बड़ी संख्या में छात्रों के सिर मुंडवाने से रैगिंग होने पर भी अंदेशा हो रहा है।
कुलपति डॉक्टर राजकुमार से जब इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने रैगिंग को एक संस्कार बताया। कहा कि, रैगिंग हमारे समय में होती थी। हमारे सीनियर्स रैगिंग करते थे व पढ़ाई में पूरा सहयोग भी करते थे। विश्वविद्यालय में रैगिंग जैसा कोई मामला सामने नहीं आया है। यदि किसी छात्र को कोई परेशानी है तो उसे एंटी रैगिंग कमेटी से शिकायत करनी चाहिए। फिर भी अगर कोई छात्र शिकायत करता है तो मुकदमा दर्ज कर जांच की जाएगी। नाम व पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
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