अरुण मिश्रा ने हाईकोर्ट में लगाई जमानत अर्जी, सुनवाई की तिथि तय नहीं

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कानपुर, सड़क निर्माण में करोड़ों के भ्रष्टाचार में गिरफ्तार किए गए यूपीसीडा के निलंबित प्रधान महाप्रबंधक अरुण मिश्रा ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की है। अभी सुनवाई की तिथि तय नहीं हुई है। चकेरी पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद लखनऊ की भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में पेश किया था, जहां से उसे जेल भेजा गया था।

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कानपुर में पीडब्लूडी की बनवाई सड़क के नाम पर करीब दो करोड़ के घोटाले में आरोपित यूपीसीडा के निलंबित प्रधान महाप्रबंधक अरुण मिश्रा को चकेरी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। लखनऊ की भ्रष्टचार निवारण कोर्ट ने जेल भेज दिया था।

वर्ष 2009 में नेशनल हाईवे से पाली गांव होकर चकेरी औद्योगिक क्षेत्र में जाने वाली 1940 मीटर सड़क को पीडब्ल्यूडी ने बनवाया था। इसके बावजूद यूपीसीडा के अफसरों ने पीडब्ल्यूडी द्वारा बनवाई गई इस सड़क को यूपीसीडा के निर्माण में दर्शाया था। यूपीसीडा के तत्कालीन अधिशाषी अभियंता अजीत सिंह, सहायक अभियंता नागेंद्र सिंह और अवर अभियंता एसके वर्मा ने मेसर्स कार्तिक इंटरप्राइजेज फर्म द्वारा बनाए जाने की बात कहते हुए 12 जनवरी, 2009 को 2 करोड़ 11 लाख रुपये का भुगतान भी पास करा लिया था।

मामला खुलने पर यूपीसीडा के तत्कालीन प्रबंध निदेशक इफ्तेखारुद्दीन ने 2012 में अजीत सिंह, नागेंद्र सिंह, एसके वर्मा और फर्म के खिलाफ चकेरी थाने में एफआइआर दर्ज कराई थी। जांच में यूपीसीडा प्रधान महाप्रबंधक अरुण मिश्रा भी दोषी पाए गए थे। आठ साल बाद पिछले माह शासन से अभियोजन की स्वीकृति मिलते ही चकेरी पुलिस ने अरुण मिश्रा को गिरफ्तार करके लखनऊ की भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में पेश किया था।

 

कोर्ट ने अरुण मिश्रा को जेल भेज दिया था, तब से अरुण के वकील जमानत लेने का प्रयास कर रहे हैं। सीओ कैंट सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि पीसी कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब अरुण मिश्रा ने हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की है। फिलहाल जमानत अर्जी पर सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है।

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