लखनऊ। भारत की आंतरिक सुरक्षा पर बड़ा खतरा बनने वाली चीन की मोबाइल कंपनी वीवो पर अब शिकंजा कसता जा रहा है। देश में एक आइएमईआइ नम्बर पर 13 हजार 500 से अधिक मोबाइल फोन उतारने वाली चीन की विख्यात मोबाइल कंपनी वीवो पर मेरठ की पुलिस के साथ ही एसटीएफ भी पड़ताल में लगी है।
कोरोना वायरस का संक्रमण विश्व भर में फैलाने वाले चीन की मोबाइल कंपनी का फर्जीवाड़ा भी जल्दी ही खुलेगा। देश में चीन की मोबाइल कंपनी वीवो के एक ही आइएमईआइ नम्बर के 13 हजार 500 से अधिक मोबाइल फोन चलने की पुष्टि पर देश की आंतरिक सुरक्षा में दखल पर वीवो कंपनी के साथ मेरठ में उसके सर्विस सेंटर के फर्जीवाड़ा की रिपोर्ट केंद्रीय सरकार के पास भेजी गई है।
वीवो कंपनी ने मेरठ पुलिस के नोटिस का जवाब नहीं दिया है। इसके साथ ही पुलिस ने देश में एक आइएमइआइ पर संचालित हो रहे 13,557 मोबाइल नंबरों का रिकॉर्ड मांगा है, ताकि इन नंबरों की देश की सुरक्षा तथा आपराधिक गतिविधियों में प्रयोग की आशंका न रहे। ऐसे में उक्त सभी मालिकों के मोबाइल फोन जब्त भी हो सकते हैं। इस प्रकरण में पुलिस और साइबर सेल की टीम संयुक्त रूप से काम कर रही है। सबसे पहले एक आइएमईआइ पर संचालित हो रहे मोबाइल फोनों की पड़ताल करनी है, ताकि कोई बड़ा अपराध न हो जाए। कंपनी के जवाब का भी इंतजार है।
वीवो के गुरुग्राम प्लांट में भी होगी पड़ताल
वीवो कंपनी के मोबाइल फर्जीवाड़े में पुलिस की जांच में स्पष्ट हो चुका हैं, कि आइएमईआइ बदले जाने पर सॢवस सेंटर का कोई मामला सामने नहीं आया है। इसमें कंपनी का फाल्ट पता चला है। अब साइबर क्राइम की एक टीम गुरुग्राम में वीवो मोबाइल के प्लांट में जांच करेगी। इस प्रकरण में प्लांट में काम करने वाले इंजीनियरों के भी बयान दर्ज होंगे। मेरठ की साइबर की टीम ने इसके लिए वीवो कंपनी को पत्र जारी कर दिया है।
मेरठ के एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि साइबर सेल और पुलिस की टीम वीवो को सभी तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है। अभी तक जांच में सामने आया कि आइएमईआइ बदलने में सॢवस सेंटर को कोई फाल्ट नहीं है। कंपनी की तरफ से ही आइएमईआइ बदल रही है। पुलिस और साइबर सेल की टीम संयुक्त रुप से कंपनी के गुरुग्राम वाले प्लांट पर जाएगी। वहां पर इंजीनियरों के बयान दर्ज किए जाएगे।
साथ ही मोबाइल की आइएमईआइ बदलने के तकनीकी पहलु की जांच होगी। उसके बाद ही पता चल सकेंगा कि आइएमईआइ बदलने के पीछे किसका हाथ है। कहीं यह देश की सुरक्षा में सेंध तो नहीं लगाई जा रही है। कंपनी को इस बारे में पुलिस की तरफ से नोटिस देकर जानकारी दी गई है। उसके बाद कंपनी के लुधियाना वाले प्लांट भी पड़ताल की जा सकती है। गुरुग्राम के प्लांट की पड़ताल करने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
कंपनी के तकनीकी यूपी हेड की तरफ से दर्ज कराए बयानों के बाद पुलिस की विवचेना उसी आधार पर मोड दी गई है। कुछ अन्य मोबाइल कंपनियों के इंजीनियरों की भी राय ली गई है। एसएसपी अजय साहनी का कहना है कि पुलिस पूरे मामले की विस्तार से पड़ताल करने के बाद ही मुकदमे में आरोप पत्र दालिख करेगी।
मेरठ मे एडीजी ऑफिस में तैनात दारोगा आशाराम ने नौ मार्च 2017 में वीवो कंपनी का मोबाइल खरीदा था। मोबाइल खराब होने पर 24 सितंबर 2019 को ब्रह्मपुरी के शारदा रोड स्थित वीवो के सॢवस सेंटर पर सही कराने के लिए दिया, जिसमें स्क्रीन, डिस्प्ले, एफएम बोर्ड बदलने की बात कहकर 2650 रुपये वसूले गए। घर पर आकर देखा की मोबाइल का आइएमईआइ नंबर बदल गया है।
उसके बाद दारोगा ने मामले की शिकायत एडीजी से की। उन्होंने मेरठ साइबर सेल की टीम को जांच करने के आदेश दिए। साइबर की टीम ने जीओ कंपनी से आइएमइआइ रन कराई, जिसमें सामने आया कि 13,557 मोबाइल एक ही आइएमईआइ पर चल रहे हैं। दारोगा की तहरीर पर मेडिकल थाने में मुकदमा दर्जकर साइबर सेल को जांच दी गई।
एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि पुलिस सबसे पहले एक आइएमइआइ पर चल रहे 13,557 मोबाइलों की आइडी खंगाल रही है। जियो कंपनी से सभी नंबरों का डाटा मांगा है। फिलहाल यह पड़ताल की जाएगी कि उक्त मोबाइलों का प्रयोग कौन कर रहा है और इनका आइएमइआइ नंबर कैसे बदल गया। इसकी जांच एसटीएफ से कराने के लिए शासन को भी पत्र लिखा है, क्योंकि यह मामला देश की सुरक्षा में सेंध लगाने से जुड़ा है।
साक्ष्य जुटाकर दाखिल होगी चार्जशीट
मेरठ के एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह ने बताया कि बेहद गंभीर मामला है। एक ही आइएमइआइ नंबर दूसरे मोबाइल फोन पर नहीं चल सकता। कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर और सर्विस सेंटर स्वामी को भी जांच में शामिल कर हर स्तर पर जांच कराई जा रही है। कंपनी से भी पूछा गया है कि एक आइएमईआइ नंबर दूसरे मोबाइल में कैसे पहुंचा। यह कोई टेक्निकल समस्या तो नहीं है। पूरे मामले की जांच के लिए पुलिस और साइबर टीम गठित की है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। साइबर सेल की टीम साक्ष्य जुटा रही है।
ट्राई के नियमों का उल्लंघन
साइबर सेल ने पूरे मामले में वीवो इंडिया के नोडल अधिकारी को नोटिस देकर पूछा कि ट्राई के किस नियम के अनुसार एक आइएमइआइ एक से ज्यादा मोबाइल नंबर सक्रिय हैं। अभी तक कंपनी ने नोटिस का जवाब नहीं दिया गया। साइबर सेल ने माना है कि इस मामले में मोबाइल कंपनी की लापरवाही और ट्राई के नियमों का उल्लंघन हो रहा है। इतना बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद भी कंपनी खामोश है। गत वर्ष जबलपुर में भी कंपनी के एक आइएमईआइ पर एक लाख मोबाइल चलते मिले थे। तब भी कंपनी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई थी।
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