क्या भारत 359 रनों का पीछा करके इतिहास रचेगा?

क्या भारत 359 रनों का पीछा करके न्यूज़ीलैंड को हरा पाएगा? ये सवाल इस समय हर क्रिकेट प्रशंसक के ज़ेहन में है. पुणे में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में, भारतीय टीम के सामने 359 रनों का विशाल लक्ष्य है. क्या भारत यह लक्ष्य हासिल कर पाएगा और न्यूज़ीलैंड को उसकी ही धरती पर मात दे पाएगा? आइए जानते हैं इस रोमांचक मुकाबले के बारे में.

2008 का इतिहास दोहराएगा क्या भारत?

भारतीय टीम के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण लेकिन असंभव नहीं है. चेन्नई में साल 2008 में भारत ने 387 रनों का पीछा करके इंग्लैंड को 6 विकेट से हराया था. उस समय मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग की पारी ने भारत को जीत दिलाई थी. लेकिन क्या 2023 की यह टीम 2008 वाली टीम का करिश्मा दोहरा पाएगी? इस प्रश्न का उत्तर पुणे टेस्ट के आखिरी दिन ही मिलेगा. इस टेस्ट में अगर भारत 359 रन का पीछा करने में सफल रहता है तो भारत में पहली बार यह हासिल होगा कि विदेशी टीम के ख़िलाफ़ 350 प्लस रनों का लक्ष्य दूसरी बार हासिल किया गया होगा.

सचिन और सहवाग का जादू

2008 के मैच में, सचिन तेंदुलकर के नाबाद 103 रन और वीरेंद्र सहवाग के 83 रनों ने भारत को जीत दिलाई थी. वीरू की तूफानी 68 गेंदों की पारी में 11 चौके और 4 छक्के शामिल थे. उनका यह परफ़ॉर्मेंस यादगार बना. ऐसे धाकड़ प्रदर्शन की भारतीय टीम को इस मुकाबले में भी जरूरत होगी। क्या भारत के बल्लेबाज़ इस चुनौती को स्वीकार करेंगे?

चुनौतियाँ और उम्मीदें

भारत को अपने रन-चेज़ को सफल बनाने के लिए पहली पारी के दौरान ही मज़बूत शुरुआत करने की ज़रूरत है. इस टेस्ट में अगर भारतीय बल्लेबाज ओपनरों के साथ-साथ मध्यक्रम के बल्लेबाज़ भी ज़िम्मेदारी निभाते हैं तो इस लक्ष्य का पीछा करना आसान हो जाएगा. न्यूज़ीलैंड के गेंदबाज़ भी ज़बरदस्त हैं और उन्हें आसानी से नहीं लिया जा सकता है. भारत को रन चेज के दौरान सावधानीपूर्वक खेलना होगा. भारत को एक अच्छा प्लान बनाना होगा और साथ में इस योजना का सटीक अमल भी करना होगा. क्या इस बार भी कोई तूफ़ानी पारी देखने को मिलेगी?

न्यूज़ीलैंड का भारत में रिकॉर्ड

न्यूज़ीलैंड की टीम ने भारत में अभी तक कभी भी द्विपक्षीय टेस्ट सीरीज़ नहीं जीती है. उनका भारत के विरुद्ध प्रदर्शन सबसे ज़्यादा मिला जुला रहा है. वैसे भी अगर पिछले रिकॉर्ड को देखें तो भारत हमेशा से न्यूज़ीलैंड पर हावी रहा है. यह ख़ासकर टेस्ट मैचों में स्पष्ट है. 1955 से लेकर 2021 तक हुए कई मुकाबलों में भारत ही सबसे आगे रहा है.

ऐतिहासिक रन चेज़

यह ध्यान देने योग्य है कि भारत ने घरेलू मैदान पर 300+ रनों का पीछा 26 बार किया है, जिसमें से केवल एक मैच में जीत हासिल की है. 14 मैच हार गए, और बाकी ड्रॉ रहे. इससे पता चलता है कि 300+ का लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होता, हालांकि असंभव भी नहीं। यह ज़रूर मुश्किल है.

पुणे टेस्ट: खिलाड़ियों पर नज़र

इस मुक़ाबले में दोनों टीमों के कुछ अहम खिलाड़ी अपने शानदार प्रदर्शन से खेल को रोमांचक बना देंगे. न्यूज़ीलैंड के टॉम लैथम, विल यंग और डेरिल मिचेल जैसे खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करेंगे. दूसरी तरफ़, भारत में रोहित शर्मा, विराट कोहली, और रवीन्द्र जडेजा जैसे बड़े खिलाड़ी भारत की उम्मीदों की कमान संभालेंगे। क्या ये खिलाड़ी अपनी टीम को ज़रूरी जीत दिला पाएँगे?

दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवन

न्यूज़ीलैंड: टॉम लैथम (कप्तान), डेवोन कॉन्वे, विल यंग, रचिन रवींद्र, डेरिल मिचेल, टॉम ब्लंडेल (विकेटकीपर), ग्लेन फिलिप्स, टिम साउदी, मिचेल सेंटनर, एजाज पटेल, विलियम ओरोर्के

भारत: यशस्वी जायसवाल, रोहित शर्मा (कप्तान), शुभमन गिल, विराट कोहली, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), सरफराज खान, रवींद्र जडेजा, वॉशिंगटन सुंदर, रविचंद्रन अश्विन, आकाश दीप, जसप्रीत बुमराह

टेक अवे पॉइंट्स

  • भारत को 359 रनों का लक्ष्य हासिल करना होगा.
  • 2008 के मैच की यादें फिर से ताज़ा हुई हैं.
  • न्यूज़ीलैंड का भारत में रिकॉर्ड ज़्यादा शानदार नहीं रहा है.
  • रोमांचक मुक़ाबला जारी है और दोनों ही टीमें जीत के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे।

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