वाराणसी कॉलेज मस्जिद विवाद: क्या है पूरा सच?

वाराणसी कॉलेज में मस्जिद विवाद: क्या है पूरा मामला?

क्या आप जानते हैं वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज में एक मस्जिद को लेकर कैसे तूफान आया? छात्रों ने हनुमान चालीसा पढ़ने की कोशिश की, पुलिस ने कई को हिरासत में लिया और पूरा मामला सुर्खियों में आ गया। आइए जानते हैं इस विवाद की पूरी कहानी।

विवाद की शुरुआत

यह विवाद सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड की एक चिट्ठी से शुरू हुआ। साल 2018 में, बोर्ड ने कॉलेज से कॉलेज परिसर में बनी मस्जिद के बारे में जानकारी मांगी। हालांकि, 2021 में वक्फ बोर्ड ने कॉलेज की संपत्ति पर अपना दावा छोड़ दिया। फिर भी, 2018 का पत्र सामने आने पर विवाद फिर से शुरू हो गया।

कॉलेज का दावा

कॉलेज का कहना है कि उनकी जमीन इंडाउमेंट ट्रस्ट की है। चैरिटेबल इंडाउमेंट एक्ट के अनुसार, आधार वर्ष के बाद ट्रस्ट की जमीन पर किसी का भी मालिकाना हक नहीं रहता। इसलिए, उनके अनुसार, मस्जिद का अस्तित्व ही नहीं होना चाहिए। कॉलेज प्रिंसिपल ने बताया कि पहले यहां मजार थी, जो बाद में मस्जिद बन गई, लेकिन खसरा और खतौनी में मस्जिद का नाम नहीं है।

वक्फ बोर्ड का पक्ष

उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जफर फारूकी ने बताया कि अंजुमन इन्तेजामिया मसाजिद ने बोर्ड को पत्र लिखकर कॉलेज में स्थित मस्जिद को सुन्नी वक्फ बोर्ड में दर्ज करने का अनुरोध किया था। जब कॉलेज से संपर्क किया गया, तो पता चला कि वह मस्जिद कॉलेज की संपत्ति है। इसलिए, बोर्ड ने दावा वापस ले लिया और एक पत्र भी जारी किया। चेयरमैन के मुताबिक, 2018 के पत्र को अचानक वायरल किया जा रहा है, जबकि इसका कोई मतलब नहीं है क्योंकि यह मामला पहले ही निपट चुका है।

क्या है सच्चाई?

यह विवाद अब तक जारी है क्योंकि कई तथ्य विरोधाभासी हैं। एक तरफ कॉलेज अपनी जमीन का दावा करता है, तो दूसरी तरफ, 2018 का पत्र विवाद को फिर से हवा दे रहा है। वक्फ बोर्ड का दावा खारिज हो चुका है, लेकिन फिर भी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसलिए यह एक जटिल मामला है जिसमें सभी पहलुओं पर गहराई से जांच की आवश्यकता है।

मुख्य बातें

  • वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज में मस्जिद को लेकर विवाद
  • 2018 में वक्फ बोर्ड ने कॉलेज से मस्जिद की जानकारी मांगी थी।
  • 2021 में वक्फ बोर्ड ने कॉलेज पर अपना दावा त्याग दिया।
  • कॉलेज का दावा है कि मस्जिद उनकी जमीन पर नहीं है और इसका रिकॉर्ड भी नहीं है।
  • वक्फ बोर्ड चेयरमैन का कहना है कि 2018 का पत्र अब बेमानी है और उसका कोई महत्व नहीं है।

विवाद के आगे का रास्ता

इस विवाद के निष्कर्ष के लिए सभी पक्षों से पारदर्शी और तथ्यात्मक जानकारी की आवश्यकता है। अधिकारियों को मामले की जांच करनी चाहिए और एक तटस्थ और निष्पक्ष समाधान तलाशना चाहिए। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इस मामले का इस्तेमाल किसी भी तरह के सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाने के लिए नहीं किया जाता है।

Take Away Points:

  • वाराणसी कॉलेज मस्जिद विवाद में कई तरह के दावे और विरोधाभाषी तथ्य हैं।
  • 2018 का पत्र, जिसने विवाद को फिर से जीवंत किया है, अब वक्फ बोर्ड द्वारा खारिज कर दिया गया है।
  • मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके और तनावपूर्ण स्थिति से बचा जा सके।

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