विदाई की बेला में मानसून ने ढाया कहर

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बांदा। सितंबर के आखिरी दिनों में बारिश ने सितम ढा दिया। शनिवार को तड़के से देर रात तक रुक-रुक कर होती रही बारिश से जनजीवन हो गया। घनी बस्तियों, व्यस्त इलाकों और सड़कों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए। उधर, सीमावर्ती मध्य प्रदेश में हो रही मूसलाधार बारिश से गंगऊ और बरियारपुर बांध एक बार फिर उफना गए। दोनों बांधों से शुक्रवार को एक-एक लाख क्यूसेक पानी केन नदी में डिस्चार्ज होता रहा। 24 घंटे के दौरान 65 हजार क्यूसेक डिस्चार्ज में वृद्धि हुई है। बांदा जिले में लगभग 50 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई। विदाई के दिनों में मानसून ने तेजी पकड़ ली है। कई दिनों से रोजाना हो रही हल्की वर्षा ने शनिवार को विकराल रूप ले लिया। हालांकि मौसम विभाग ने इसके लिए पूर्व से ही पूर्वानुमान जारी किया था। शुक्रवार को तड़के से पूरे मंडल में घने बादल छाए रहे।

रुक-रुक कर कई चरणों में पूरा दिन मूसलाधार बारिश हुई। सड़कें, गलियां, नालियां उफना गईं। मंडल मुख्यालय में जगह-जगह जलभराव हो गया। स्वराज कालोनी की गलियों में कमर तक पानी भर गया। शहर के लगभग सभी इलाकों में यह समस्या रही। उधर, बारिश से तापमान में तकरीबन तीन डिग्री की कमी आ गई। यह 26 डिग्री पर आ गया। उमस और गर्मी फिलहाल काफूर हो गई। तेज बारिश से कई स्थानों पर पेड़ गिरने और बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त होने की खबर है। उधर, मध्य प्रदेश में भी मानसून का सितम जारी है। यहां घाटियों में हो रही बारिश से बीते 24 घंटों के दौरान गंगऊ और बरियारपुर बांधों में जल स्तर में भारी वृद्धि हुई है।

गंगऊ बांध से 1,07,285 और बरियारपुर से 1,01,000 क्यूसिक पानी क्रस्टवाल से ऊपर उफनाकर केन नदी में गिरता रहा। नतीजे में केन नदी का जल स्तर फिर बढ़ने लगा है।शुक्रवार को शाम यह बांदा में 100 मीटर का पैमाना पार कर गई। खतरे का निशान 104 मीटर पर है। केंद्रीय जल आयोग की स्थानीय यूनिट ने बताया कि 15 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से केन के जल स्तर में वृद्धि हो रही है। उधर, चिल्ला घाट में यमुना नदी का जल स्तर फिलहाल घटाव पर है। शुक्रवार को शाम यह 95.94 मीटर पर थी। हालांकि केन के बढ़ने से इसके जल स्तर में भी मामूली वृद्धि के आसार हैं।

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