लखनऊ। रायबरेली से विधायक अदिति सिंह को प्रियंका गांधी की करीबी कहा जाता है कि उनके कहने पर ही वह कांग्रेस से चुनाव लड़ी थीं। बता दें कि अदिति के दिवंगत पिता अखिलेश सिंह लगातार 5 बार विधायक रहे।
कांग्रेस लंबे समय से इस विधानसभा सीट पर काबिज होने की कोशिश में थी, लेकिन सफलता न मिलने पर अदिति को ही पार्टी जॉइन करा मिशन पूरा किया था। अब अदिति राह बदलती हैं तो लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस को मिली यह सीट एक बार फिर से छिन सकती है।
2 अक्टूबर को आयोजित विधानसभा सत्र में अचानक पहुंचना बीजेपी के लिए सरप्राइज था तो कांग्रेस के लिए झटका। भले ही कांग्रेस विधायक ने पार्टी के खिलाफ कुछ न कहा हो, लेकिन योगी सरकार की तारीफ कर बड़े संकेत दे दिए।
प्रियंका गांधी की पदयात्रा से इतर विधानसभा में पहुंच अदिति ने जता दिया कि भविष्य में उनकी राहें कांग्रेस से अलग भी हो सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो आजादी के बाद से ही रायबरेली फतह का सपना देख रही बीजेपी के लिए यह बड़ी जीत होगी।
विधानसभा के बाद सीएम योगी आदित्यानाथ के कमरे में जाकर अदिति के मिलने से भी चर्चाओं को बल मिला है।रायबरेली से कांग्रेस की विधायक अदिति सिंह के रवैये से कांग्रेस सख्त नाराज है। कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष द्वारा विधानसभा के विशेष सत्र का बहिष्कार किया गया था। इसके बावजूद अदिति सिंह सदन में पहुंचीं।
बाद में उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की। पार्टी विप का उल्लंघन करने के चलते ं कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू ने दी पार्टी विप का उल्लंघन करने पर अदिति सिंह को नोटिस भेजा है।
उन्होंने यह भी कहा है कि स्पष्टीकरण न होने की सूरत में पार्टी अदिति सिंह के खिलाफ ऐक्शन लेगी। नोटिस का जवाब देने के लिए विधायक अदिति सिंह को दो दिन का समय दिया गया है।
वहीं, अदिति सिंह के इस कदम से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके घर का घेराव किया। कांग्रेस जिला अध्यक्ष वीके शुक्ला के नेतृत्व में कांग्रेसियों अदिति सिंह के खिलाफ नारेबाजी की और उनके इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन कर रहे कांग्रेसियों ने बीजेपी की कठपुतली बनना बंद करो और सत्ता की गोद में बैठना बंद करो जैसे नारे वाले पोस्टर भी लहराए।
इस लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को अमेठी और रायबरेली की दो सीटें मिलने के आसार थे, जिनमें से एक गढ़ अमेठी में बीजेपी ने सेंध लगाते हुए राहुल गांधी को बेदखल कर दिया था।
हालांकि किसी तरह कांग्रेस 80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश में रायबरेली की एकमात्र सीट को अपने खाते में रख पाई। अब यदि 2024 में बीजेपी यहां भी कांग्रेस को बेदखल करने की कोशिश में जुटी दिखे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।
अदिति सिंह ने आर्टिकल 370 को लेकर केंद्र सरकार के फैसले का भी समर्थन किया था। राहुल गांधी और सीनियर नेताओं ने इस मसले पर केंद्र की आलोचना की थी, लेकिन अदिति सिंह ने इसे राष्ट्रहित में उठाया गया कदम बताया था। राजनीतिक विश्लेषक उस दौरान की गई उनकी टिप्पणी को भी मौजूदा घटनाक्रम से जोड़कर देख रहे हैं।
यही नहीं पार्टी से इतर विधानसभा पहुंची अदिति को अगले ही दिन यानी गुरुवार को योगी सरकार ने वाई कैटिगरी सिक्यॉरिटी का ऐलान कर दिया। इससे इन कयासों को बल मिला है कि बीजेपी भी उन्हें लुभाने की कोशिशें कर रही है।
आम चुनाव से पहले बीजेपी ने एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह और उनके भाइयों को अपने पाले में कर लिया था। दिनेश के साथ हरचंदपुर सीट से विधायक राकेश सिंह भले ही बीजेपी में आधिकारिक तौर पर नहीं आए, लेकिन अब कांग्रेस के नहीं कहे जा सकते।
दिनेश को सोनिया के खिलाफ उतारकर बीजेपी ने क्षत्रिय बहुल रायबरेली के सामाजिक समीकरणों में भी घुसपैठ बनाई और चुनाव भी मजबूती से लड़ा। अब जिले की हाई प्रोफाइल विधानसभा सीट की विधायक यदि बीजेपी के पाले में जाती हैं तो उसके लिए अहम कामयाबी होगी और मिशन रायबरेली फतह की ओर एक बड़ा कदम होगा।
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