राज्यसभा में भूचाल! धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: क्या है पूरा खेल?
क्या आप जानते हैं कि भारत के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी चल रही है? यह राजनीतिक उथल-पुथल का एक ऐसा अध्याय है जो देश को हैरान कर सकता है! 70 सांसदों के हस्ताक्षर पहले ही जुटा लिए गए हैं, और यह प्रस्ताव शीतकालीन सत्र में तूफान ला सकता है। लेकिन सवाल यह है कि इस प्रस्ताव के पीछे क्या मंशा है, और क्या यह सफल होगा?
धनखड़ विवाद: क्या है पूरा मामला?
यह अविश्वास प्रस्ताव सिर्फ़ एक अचानक हुई घटना नहीं है। इसके पीछे कई महीनों से चल रहे तनाव और विवाद हैं। कांग्रेस ने राज्यसभा में धनखड़ पर पक्षपात का आरोप लगाया है, खासकर जॉर्ज सोरोस के मुद्दे पर चर्चा शुरू करने के तरीके को लेकर। कांग्रेस का आरोप है कि धनखड़ बीजेपी के सदस्यों के पक्ष में काम कर रहे हैं और विपक्ष की आवाज़ को दबा रहे हैं। इस विवाद ने विपक्षी एकता पर भी सवाल उठा दिए हैं, और ‘इंडिया’ गठबंधन के अंदर ही मतभेदों को उजागर किया है।
कौन हैं साथ और कौन खिलाफ?
हालांकि कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का नेतृत्व किया है, लेकिन ‘इंडिया’ गठबंधन में टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसे दलों की भूमिका अस्पष्ट बनी हुई है। ममता बनर्जी और लालू यादव के बीच नेतृत्व को लेकर जो चल रहा विवाद है, इस प्रस्ताव को प्रभावित कर सकता है। क्या ये सभी दल मिलकर इस प्रस्ताव को आगे बढ़ा पाएंगे, या ये एक फीका पड़ने वाला प्रदर्शन साबित होगा?
राजनीतिक उठापटक: क्या है अविश्वास प्रस्ताव का महत्व?
राज्यसभा के सभापति को हटाने के लिए 50 सदस्यों के हस्ताक्षर की ज़रूरत होती है, लेकिन 70 सांसदों का समर्थन इस प्रस्ताव की गंभीरता को दर्शाता है। यह सिर्फ़ धनखड़ के खिलाफ नहीं, बल्कि मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष की रणनीति का भी हिस्सा है। अडानी-मोदी विवाद से कांग्रेस की एकाकी स्थिति के बाद, यह प्रस्ताव कांग्रेस के लिए अपनी प्रासंगिकता बचाने का प्रयास लगता है।
क्या होगा अगला कदम?
यह प्रस्ताव राज्यसभा में पास होगा या नहीं, यह तो समय ही बताएगा। लेकिन इससे ‘इंडिया’ गठबंधन के अंदर की एकता और आगे के राजनीतिक घटनाक्रमों को प्रभावित करने की क्षमता ज़रूर है। यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष इस मुद्दे पर आगे कितना एकजुट होकर काम करता है।
क्या यह सफल होगा? चुनौतियाँ और संभावनाएँ
इस अविश्वास प्रस्ताव को पारित होने की संभावना बहुत कम है क्योंकि इसे राज्यसभा में बहुमत हासिल करना बेहद मुश्किल है। इसके अलावा, ‘इंडिया’ गठबंधन के भीतर ही मतभेद इस प्रस्ताव की सफलता में बाधा बन सकते हैं। हालाँकि, यह प्रस्ताव राजनीतिक बहस छेड़ सकता है और सरकार को रणनीति बदलने पर मजबूर कर सकता है।
आगे क्या?
यह प्रस्ताव भले ही सफल न हो, लेकिन इसने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विपक्षी दलों के बीच संघर्षों को दरकिनार करके उचित एकता संभव है? और क्या ‘इंडिया’ गठबंधन आगे एकजुट होकर मोदी सरकार को चुनौती दे पाएगा?
Take Away Points
- राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव एक गंभीर राजनीतिक घटना है।
- यह प्रस्ताव कांग्रेस द्वारा लाया जा रहा है, लेकिन अन्य विपक्षी दलों के समर्थन पर निर्भर है।
- इस प्रस्ताव का सफल होना मुश्किल लग रहा है, लेकिन यह राजनीतिक चर्चा और बहस को ज़रूर जीवंत कर सकता है।
- इस प्रस्ताव का ‘इंडिया’ गठबंधन की एकता पर गहरा असर पड़ने की आशंका है।

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