रूस ने दिया सैनिकों को यूक्रेनी महिलाओं के रेप का फरमान!

Russia-Ukraine War Latest Update: रूस और यूक्रेन के बीच बीते 9 महीने से जारी युद्ध का कोई निष्कर्स नहीं दिखाई दे रहा। वहीं इस युद्ध में अब तक लाखों की संख्या में जिंदगियां तबाह भी हो चुकी हैं।
साथ ही लाखों की संख्या में लोग बेघर भी हो चुके हैं और भारी तादाद में लोग यूक्रेन छोड़कर दूसरे देशों में पनाह लेने को मजबूर भी हैं।
वहीं इतनी तबाही के बाद भी दोनों देश एक दूसरे पर लगातार हमला किए जा रहे हैं और ताजा घटनाक्रम में कथित रूप से रूस ने यूक्रेन के खिलाफ अपने सैनिकों को अजीब फरमान दिया है। बता दें संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने कहा कि रूस अपने सैनिकों को वियाग्रा दे रहा है ताकि वे यूक्रेनी महिलाओं का रेप करें।
जैसे ही रूस-यूक्रेन युद्ध अक्टूबर में अपने आठवें महीने में आगे बढ़ रहा है, संकट के साथ ही कई भयानक तस्वीरें भी सामने आ रही हैं। वहीं इनमें सबसे अधिक परेशान करने वाला था बुका नरसंहार। जिसमें संयुक्त राष्ट्र ने यह दावा किया है कि आक्रमण के दौरान रूसी सैनिकों को यूक्रेनियन से बलात्कार करने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है।
वहीं संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के एक अधिकारी ने यह दावा भी किया है कि रूस अपने सैनिकों को ड्रग्स मुहैया करवा रहा है ताकि वे “सैन्य रणनीति” के तहत यूक्रेनियन पर यौन हमला भी कर सकें। इसी के साथ संयुक्त राष्ट्र के दावों के अनुसार, रूसी सैनिकों को वियाग्रा दी जा रही है ताकि यूक्रेन में नागरिकों का बलात्कार किया जा सके। संघर्ष में यौन हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन ने एक चौंकाने वाला खुलासा भी किया है। पैटन ने यह कहा कि जब आप महिलाओं को वियाग्रा से लैस रूसी सैनिकों के बारे में गवाही देते सुनते हैं, तो यह स्पष्ट रूप से एक सैन्य रणनीति है।
वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध की चौंकाने वाली भयावहता के बारे में बात करते है तो पैटन ने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने आक्रमण शुरू होने के बाद से बलात्कार और यौन हिंसा के सौ से अधिक मामले दर्ज किए हैं। वहीं पीड़ितों में न केवल महिलाएं और लड़कियां हैं, बल्कि पुरुष और लड़के भी शामिल हैं। वहीं इस साल की शुरुआत में, यूक्रेन में संयुक्त राष्ट्र स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय जांच आयोग ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें कहा गया कि रूसी सैनिक नागरिकों के खिलाफ क्रूर युद्ध अपराध कर रहे हैं जिसमें बलात्कार, यातना गैरकानूनी गतिविधियां भी शामिल हैं।
आयोग ने यह भी दर्ज किया है कि युद्ध की शुरुआत के बाद से यौन हिंसा और हमले के शिकार लोगों की उम्र चार से 82 वर्ष के बीच थी और ऐसे मामले भी दर्ज किए गए थे जहां परिवार के सदस्यों को यौन हिंसक कृत्यों को देखने के लिए मजबूर किया गया था। 

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