स्विस बैंक का बड़ा खुलासा, आज भारतीयों का स्विस बैंक में जमा काला धन के रहस्य से उठेगा पर्दा

[object Promise]

नई दिल्ली । मोदी सरकार बीते 5 सालों में ब्लैकमनी पर नकेल कसने के लिए नोटबंदी और बेनामी प्रॉपर्टी से जुड़े कई अहम फैसले लिए। अब सरकार के दूसरे कार्यकाल में ब्घ्लैकमनी को लेकर जो खबर आई है वो थोड़ी राहत देने वाली है।

सूचना आदान प्रदान की यह व्यवस्था शुरू होने से स्विस बैंक में जमा भारतीयों के पैसों की जानकारी अब गोपनीय नहीं रहेगी। आज से गोपनीयता का दौर समाप्त होने जा रहा है और इसके साथ ही भारतीयों के स्विस बैंक खातों से पर्दा उठने जा रहा है।

भारतीयों के स्विस बैंक खातों की जानकारी रविवार से भारत के कर विभाग के पास होगी। भारत और स्विट्जरलैंड के बीच बैंकिंग सूचनाओं के स्वतः आदान-प्रदान के समझौते के प्रभावी होने के साथ भारतीयों के स्विस बैंक खातों पर से रहस्य का पर्दा उठ जाएगा।

सीबीडीटी का कहना है कि सूचना आदान-प्रदान की यह व्यवस्था शुरू होने के ठीक पहले भारत आए स्विट्जरलैंड के एक प्रतिनिधिमंडल ने राजस्व सचिव एबी पांडेय, बोर्ड के चेयरमैन पीसी मोदी और बोर्ड के सदस्य (विधायी) अखिलेश रंजन के साथ बैठक की. 29-30 अगस्त के बीच आए इस प्रतिनिधिमंडल की अगुआई स्विट्जरलैंड के अंतरराष्ट्रीय वित्त मामलों के राज्य सचिवालय में कर विभाग में उप प्रमुख निकोलस मारियो ने की।

वित्तीय खातों की जानकारी के स्वतः आदान-प्रदान (एईओआई) की शुरुआत सितंबर से हो रही है। सीबीडीटी ने बयान में कहा है, भारत को स्विट्जरलैंड में भारतीय नागरिकों के 2018 में बंद किए खातों की भी जानकारी मिल जाएगी।

इसी साल जून में लोकसभा में पेश फाइनैंस पर स्टैंडिंग कमिटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल लोकसभा में जून महीने में वित्त पर स्टैंडिंग कमिटी की एक रिपोर्ट पेश की गई थी।

इसके मुताबिक साल 1980 से साल 2010 के बीच 30 साल के दौरान भारतीयों के जरिए लगभग 246.48 अरब डॉलर यानी 17,25,300 करोड़ रुपये से लेकर 490 अरब डॉलर यानी 34,30,000 करोड़ रुपये के बीच काला धन देश के बाहर भेजा।

स्टैंडिंग कमिटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों संस्थानों का निष्कर्ष है कि जिन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा काला धन पाया गया है उनमें रियल एस्टेट, माइनिंग, फार्मास्युटिकल्स, पान मसाला, गुटखा, तंबाकू, बुलियन, कमॉडिटी, फिल्म एवं एजुकेशन है।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *