लाकडाउन: इन अस्थियों को है मोक्ष का इंतजार

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चंडीगढ़। कोरोना के चलते पूरे देश में लागू किये गये लॉकडाउन का असर सभी वर्गों को पड़ा है। वहीं इसका असर उन लोगों के मोक्ष पर भी पड़ा है, जिनकी मृत्यु इस दौरान हुई है. देश भर के श्मशानगृहों के लॉकर में अस्थियां लॉकडाउन खुलने के इंतजार में कैद हैं, कई जगह लॉकर फुल हो गये तो वहां के पेड़ों पर अस्थियों को कपड़े में बांधकर लटका दिया गया है। उन्हें इंतजार है मोक्ष का और यह संभव होगा लॉकडाउन खुलने के बाद।

कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगे क?र्फ्यू के कारण श्मशान घाटों में अंतिम संस्कार तो हो रहे हैं, लेकिन यहां से अस्थियां प्रयागराज व हरिद्वारमें गंगा तक प्रवाह के लिए नहीं पहुंच रही हैं. पिछले 15 दिन से यह स्थिति बनी हुई है। चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली के सभी श्मशान घाट के लॉकर फुल हो चुके हैं। ऐसे में अब संस्कार के बाद अस्थि कलश श्मशान घाट में लगे पेड़ से लटकाया जा रहा है।

जो कि कर्फ्यू खुलने का इंतजार कर रही है, जबकि कई लोगों ने अपने परिजनों के संस्कार के बाद अस्थियां अपनी कार की डिक्की में रख ली हैं, जबकि कुछ लोग मंदिर के पास लगे पेड़ों पर अस्थियां कलश में डालकर लटकाकर लॉकडाउन खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में संस्कार के बाद परिजन पर समय पर अपनी रीति रिवाज पूरे नहीं कर पा रहे हैं। कई लोग हरियाणा के पिहोवा में भी अस्थियों का विसजर्न करते हैं, उन्हें भी इसी तरह दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. ट्राईसिटी में सबसे बड़ा श्मशान घाट सेक्टर-25 में है।

इस घाट के प्रमुख पंडित गुलशन कुमार का कहना है कि उनके यहां पर 100 से ज्यादा अस्थियां रखने के लिए लॉकर है जो कि पूरी तरह से भर चुके हैं। इस समय किसी को भी उत्तराखंड में हरिद्वार जाने की मंजूरी नहीं है। चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से अस्थियां हरिद्वार में विसर्जन के लिए कर्फ्यू पास भी दे रही है, लेकिन इसके बावजूद लोग हरिद्वार नहीं पहुंच पा रहे हैं. कई लोग उत्तराखंड के बॉर्डर से मायूस वापस लौटे हैं। ऐसे में पेड़ों पर ही अस्थि कलश लटकाए जा रहे हैं।

यह है मान्यता

हिदू रीति रिवाज में यह मान्यता है कि अंतिम मुक्ति के लिए अस्थियों का गंगा में विसर्जन होना जरुरी है, जबकि सिख समुदाय में अधिकतर लोग कीतरपुर साहिब में अस्थियों का विसर्जन करते हैं, जबकि पंजाब में होने के कारण यहां पर पहुंचना मुश्किल नहीं है. चंडीगढ़ के मनीमाजरा के श्मशान घाट में भी कोई लॉकर खाली नहीं बचा है. मनीमाजरा में पंचकूला के लोग भी मरने के बाद अपने परिजनों का संस्कार करने के लिए पहुंचते हैं. मनीमाजरा श्मशान घाट के पंडित अश्विनी कुमार का कहना है कि इस समय सारे लॉकर पूरी तरह से भर चुके हैं. इसलिए कुछ अस्थियों को आसपास के श्मशान घाटों में भी कुछ दिनों के लिए रखवाने के लिए भेजा जा रहा है.

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