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पंजाब के लुधियाना में नूरमहल डेरा के प्रमुख और दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संत आशुतोष महाराज को डॉक्टरों ने पांच साल पहले मृत घोषित किया था, लेकिन भक्तों ने अभी भी उन्हें -22 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर फ्रीजर में रखा हुआ है। 28 जनवरी को 2014 को लुधियाना के डॉक्टरों ने उन्हें मृत (क्लीनिकली डेड) घोषित कर दिया था, लेकिन आज भी जहां उनका शव फ्रीजर में रखा गया है।
गौर करने वाली बात यह है कि उस कमरे की 20 भक्त 24 घंटे सुरक्षा में खड़े रहते हैं।पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब तीन डॉक्टरों का पेन हर छह माह में आशुतोष महाराज के शव का परीक्षण करता है कि उनका शव खराब तो नहीं हो रहा है वही इस डॉक्टर के पैनल ने हाल ही में दिसंबर 2018 में उनके मृत शरीर का निरीक्षण किया था और इस पैनल में शामिल डॉक्टरों के नाम दयानंद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर अजय गोयल इसी कॉलेज के फॉरेंसिक मेडिसिन डिपार्टमेंट के डॉ गौतम विश्व में जालंधर के सिविल सर्जन शामिल बताए जा रहे हैं.
कौन है आशुतोष महाराज?
आशुतोष महाराज का असली नाम महेश झा है। इनका जन्म 1946 में बिहार में दरभंगा जिले के नखलोर गांव में हुआ था। बताया जा रहा कि शादी के 18 माह बाद ही इन्होंने अपनी पत्नी और एक बच्चे को छोड़कर सतपाल महाराज से दीक्षा ले ली थी। सतपाल महाराज मानव उत्थान सेवा समिति के संस्थापक हैं। 1983 में आशुतोष महाराज ने अपना एक अलग आश्रम शुरू किया।
नूरमहल सिटी में 16 मरला हाउस खरीदने से पहले आशुतोष महाराज गांवों में जाकर सत्संग किया करते थे और अपने आश्रम का प्रचार किया करते थे। आज उनका आश्रम जालंधर में करीब 40 एकड़ से ज्यादा जमीन पर फैला हुआ है और देशभर में उनके 100 केंद्र मौजूद हैं। उन्होंने दिव्य ज्योति जागरण समिति की स्थापना 1991 में की थी और इसका मुख्यालय दिल्ली को बनाया था।
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