रिजर्व बैंक ने व्यक्तिगत ऋण लेनदारों से समय से पहले कर्ज चुकाने पर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों द्वारा वसूले जाने वाले दंड पर रोक लगा दी है। केंद्रीय बैंक ने अधिसूचना जारी कर कहा, ”एनबीएफसी कारोबारी उद्देश्य को छोड़कर अन्य कार्यों के लिये व्यक्तिगत तौर पर लिये गए फ्लोटिंग दर ऋण को समय से पहले चुकाने पर शुल्क या दंड नहीं लेंगे।”
हालांकि, आरबीआई ने यह स्पष्ट नहीं किया कि नए नियम कब से प्रभावी होंगे। केंद्रीय बैंक ने कहा कि इस परिवर्तन को प्रभावी बनाने के लिए संबंधित नियमों को अद्यतन किया गया है। उल्लेखनीय है कि मई, 2014 में आरबीआई ने वाणिज्यिक बैंकों को बंधक ऋण पर ऐसे शुल्क लगाने से प्रतिबंधित कर दिया था। हालांकि, वे निजी ऋण जैसे बिना गारंटी वाले ऋणों पर शुल्क लेने के लिए स्वतंत्र हैं।
वहीं दूसरी ओर, रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को कहा कि उसने चालू खाता खोलने के मामले में नियमों के उल्लंघन को लेकर सार्वजनिक क्षेत्र के सात बैंकों पर सामूहिक रूप से 11 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इलाहबाद बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र के ऊपर 2-2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक तथा यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया पर 1.5-1.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा है, जबकि ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
आरबीआई ने एक विज्ञप्ति में कहा है, ”रिजर्व बैंक ने 31 जुलाई 2019 के आदेश के तहत सात बैंकों पर मौद्रिक जुर्माना लगाया है। मौद्रिक जुर्माना चालू खातों को खोलने और उसके परिचालन के लिये आचार संहिता के कुछ प्रावधानों के अनुपालन नहीं करने को लेकर लगाया गया है। एक अलग विज्ञप्ति में आरबीआई ने कहा कि उसने कॉर्पोरेशन बैंक पर साइबर सुरक्षा रूपरेखा से संबंधित नियमों का अनुपालन नहीं करने को लेकर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।
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