Rahul Gandhi ने बनाई टास्क फोर्स, इसको लीड करेंगे रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुडा

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नई दिल्ली। पुलवामा हमले से पहले एनडीए और बीजेपी नेता जिस सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर शेखी बघारा करते थे उसी सर्जिकल स्ट्राइक की निगरानी करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डीएस हुडा को राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी में शामिल कर लिया है और उन्हें पार्टी की राष्ट्रीय सुरक्षा पर गठित टास्क फोर्स का मुखिया भी बना दिया है. राहुल गांधी के इस कदम को बीजेपी के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करार दिया जा रहा है।

दरअसल, कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर एक टास्क फोर्स गठित की है, जो देश के लिए विजन डॉक्युमेंट तैयार करेगी. खास बात यह है कि रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल हुडा इस टास्क फोर्स को लीड करेंगे. वह विशेषज्ञों के समूह से विचार-विमर्श कर डॉक्युमेंट तैयार करेंगे। सर्जिकल स्ट्राइक के समय हुडा नॉर्दर्न आर्मी कमांडर थे। पार्टी के ट्विटर हैंडल से किए गए ट्वीट में बताया गया। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर टास्क फोर्स गठित करने के लिए आज लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुडा (रिटायर्ड) से मुलाकात की, जो देश के लिए एक विजन पेपर तैयार करेंगे।

कांग्रेस पार्टी ने सर्जिकल स्ट्राइक के हीरो को यह जिम्मेदारी ऐसे समय में सौंपी है जब चुनाव की घोषणा होने में कुछ ही हफ्ते बचे हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पल रहे आतंकियों के खिलाफ 2016 में भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक कर कई आतंकी कैंपों को नष्ट कर दिया था।

इस ऑपरेशन में कई आतंकी मारे गए थे। केंद्र सरकार ने इसे जोर-शोर से प्रचारित भी किया. हालांकि रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल हुडा ने कहा था कि सर्जिकल स्ट्राइक के इतने प्रचार की जरूरत नहीं थी। ऐसे में माना जा रहा है कि कांग्रेस के इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सर्जिकल स्ट्राइक के दो साल बाद तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डी एस हुडा ने कहा था कि इस हमले के इतना प्रचार की जरूरत नहीं थी. हुड्डा ने कहा था । मुझे लगता है कि इसका कुछ ज्यादा ही प्रचार किया गया. सेना का ऑपरेशन महत्घ्वपूर्ण था और हमें ऐसा करना ही था. पर इसका कितना राजनीतिकरण होना चाहिए था।

यह कितना सही है या गलत यह बात राजनेताओं से पूछी जानी चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सर्जिकल स्ट्राइक को ‘जरूरत से ज्यादा तूल दिए जाने’ संबंधी सेना के पूर्व अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डीएस हुडा के बयान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला था. उन्होंने दावा किया था कि पीएम मोदी ने सेना का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया और इस पर उन्हें कोई शर्म नहीं है।

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