सरकारी भवन ही खाली नहीं करा पा रहा प्रशासन

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फतेहपुर: यूं तो जिले भर में अतिक्रमण व अवैध कब्जे हटाने का अभियान चल रहा है, नतीजा कि सड़क पर अतिक्रमण करने वाले लोगों के मकान व दुकानें तोड़ी जा रही हैं। दूसरी तरफ प्रशासन को अपना भवन खाली कराना मुश्किल पड़ रहा है। दंबगों ने एक दो नहीं बल्कि बड़ी संख्या में गांव-गांव बने सरकारी भवनों का निजी प्रयोग शुरू कर दिया है।

हमने यहां उदाहरण के लिए तीन स्थानों का जिक्र कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश गांवों में पंचायत भवन, बरातघर, सामुदायिक मिलन केंद्र जैसे भवनों पर कब्जे हैं। जानकर भी प्रधान, लेखपाल व पंचायत सचिवों ने आंखे बंद कर रखी है। जिससे लाखों की लागत से तैयार यह भवनों पर सरकारी काम काज नहीं हो पा रहे।

प्रकरण-1:

विकास खंड खजुहा में एक गांव है बसन्तीखेड़ा यहां पर बने बरातशाला में लंबे समय से अवैध कब्जा है। अंधेर यह है कि अवैध कब्जे के कारण यहां पर एक भी बार इसमें बारात नहीं ठहरी। गांव के कई प्रभावशाली लोग बारातशाला का निजी उपयोग कर रहे हैं। बारातशाला में लकड़ी कंडे व भूसा भरा है। परिसर में मवेसी बांधे जा रहे हैं। यहां के रणमस्तपुर गांव के पंचायत भवन में भूसा भरा है।

प्रकरण-2:

अमौली विकास खंड का देवरी बुजुर्ग गांव भी दंबगों की दंबगई से प्रभावित है। यहां के पंचायत भवन में दबंगों का कब्जा लंबे समय है, जबकि शिकायत की जांच में लेखपाल व पंचायत सचिव इसे कब्जा मुक्त दिखा रहे हैं। इसी ब्लाक क्षेत्र की ग्राम पंचायत भवन नसेनिया का भी हाल भी कुछ ऐसा ही है, यहां पर भी पंचायत भवन में भूसा व कंडे भरे हैं। यहां लोग शिकायत तक करने का दम नहीं रखते।

प्रकरण-3:

विकास खंड मलवां का अदमापुर गांव के सरकारी भवन भी अवैध कब्जे का शिकार हैं। यहां पर पंचायत भवन व आंगनबाड़ी केंद्र पर कुछ लोगों का अवैध कब्जा है। वर्तमान स्थिति यह है कि आंगनबाड़ी केंद्र में भूसा भरा है, जबकि पंचायत भवन में मवेशी बांधे जा रहे है। यहां भी ग्राम पंचायत के जवाबदेह कुछ भी रिपोर्ट ऊपर देने में भय खाते हैं। कई बार शिकायतों के बाद भी कब्जे बरकरार है। कब्जों पर बीडीओ से मांगी जाएगी रिपोर्ट

एसडीएम सुशील कुमार गोंड का कहना है कि पंचायत भवनों, बारातशालों पर कब्जे शिकायतें उन्हें भी मिली है। अमौली, खजुहा, देवमाई व मलवां बीडीओ से इस पर रिपोर्ट मांगी जाएगी। जहां भी कब्जे मिलेंगे उनको हटाया जाएगा। कब्जा की रिपोर्ट सही न देने वाले कर्मचारियों की सूचना डीएम को देते हुए उन पर कार्रवाई निर्धारित कराई जाएगी।

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