इस तस्वीर को गौर से देखिए। यह हाल बिहार और खासकर मुजफ्फरपुर के हर उस मां-बाप का है, जिनका बच्चा अस्पताल के बेड पर पड़ा चमकी बुखार यानी अक्यूट इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से जूझ रहा है। अब तक 108 बच्चे इलाज के अभाव में इस दुनिया को छोड़ चुके हैं, सैकड़ों बच्चे अब भी अस्पताल के बेड पर हैं। बदहवास हालत में अपने बच्चों को देखकर मां-बाप इस कदर निराश और परेशान हैं कि तस्वीरें देखकर किसी पत्थरदिल की आंखें भी नम हो जाएं।

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अपने बच्चे को पुचकारते हुए इस मां को देखिए। ऐसे सैकड़ों मांएं अपने बच्चों को चिपकाए अस्पताल में मौजूद हैं ।

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कौन मां होगी जो अपनी गोद में अपने बच्चे को इस हाल में देखना चाहेगी। देशभर में इन बच्चों के लिए दुआओं का दौर जारी है ।

एक-एक बेड पर 2-4 बच्चे भर्ती हैं और पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी 2-3 डॉक्टरों के कंधे पर है। ज्यादातर बच्चे बीमारी से कम और इलाज के अभाव में ज्यादा मरे हैं।

बिहार के मुजफ्फरपुर में एईएस से अब तक 108 मासूमों की जान जा चुकी हैं। अस्पताल में इन दिनों दर्जनों ऐंबुलेंस आ-जा रही हैं, मगर इतनी चहल-पहल के बीच भी एक अजब सन्नाटा पसरा है।

मुजफ्फरपुर के प्रमुख अस्पताल एसकेएमसीएच में दो-तीन डॉक्टरों और कुछ स्टूडेंट नर्सों के सहारे इन बच्चों का इलाज किया जा रहा है। यह हाल तब है कि जब इस बीमारी से पिछले 15 दिनों में 108 बच्चे दुनिया छोड़ चुके हैं।

यह तस्वीर मुजफ्फरपुर के अस्पताल की है। इस मां ने अपने हंसते खेलते बच्चे को खो दिया है। अस्पताल में मातम का माहौल है। कोई अपने बच्चे को खोने पर रो रहा है, तो कोई मरणासन्न अवस्था अपने बच्चे को देख लाचार होकर खुद को कोस रहा है।

मुजफ्फरपुर में एईएस से दम तोड़ रहे ज्यादातर बच्चे बेहद गरीब परिवारों से हैं। ये परिवार पूरी तरह सरकारी व्यवस्था पर आश्रित हैं, मगर अस्पतालों में दवा, डॉक्टर, सुविधाओं, इच्छाशक्ति हर चीज की कमी है।
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