सुप्रीम कोर्ट का कड़ा फैसला: उत्तर प्रदेश गुंडा एक्ट पर बड़ी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश गुंडा एक्ट: सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश का गुंडा एक्ट कितना सख्त है? सुप्रीम कोर्ट ने इसे “बहुत सख्त” और “क्रूर” तक बता दिया है! यह फैसला एक ऐसी याचिका पर आया है जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। इस लेख में हम इस महत्वपूर्ण मामले की पूरी जानकारी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मायने समझेंगे।

गुंडा एक्ट: क्या है और क्यों है विवाद?

उत्तर प्रदेश गुंडा और गैर-सामाजिक गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UP Gangster Act), 1986, का उद्देश्य राज्य में अपराध को नियंत्रित करना और गैंगस्टर गतिविधियों पर रोक लगाना है। हालांकि, इस एक्ट में कुछ ऐसी धाराएँ भी हैं जो मानवाधिकारों के उल्लंघन की आशंका पैदा करती हैं। यह एक्ट इतना सख्त है कि इसमें गिरफ्तारी और निरोध की शक्तियाँ बहुत अधिक हैं, जिसके कारण कई बेगुनाह लोग भी इसके शिकार हो सकते हैं। इस अधिनियम के क्रूर प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं, जिससे ये सवाल सामने आया है कि क्या यह कानून वास्तव में प्रभावी है या फिर केवल उत्पीड़न का एक साधन है?

अधिनियम की आलोचनात्मक धाराएँ

इस एक्ट की कुछ विशेष धाराओं पर सबसे अधिक विवाद है। इन धाराओं में जहाँ एक तरफ अपराधियों को सजा देने का प्रावधान है, वहीं दूसरी तरफ उनमें मानवाधिकारों का भी हनन होने की आशंका है। सुप्रिम कोर्ट ने इन धाराओं की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए हैं और जाँच शुरू की है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: एक बड़ा झटका?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यूपी गुंडा एक्ट बहुत सख्त है। यह फैसला उत्तर प्रदेश सरकार के लिए एक बड़ा झटका है। कोर्ट ने मामले में याचिका स्वीकार कर ली है और आगे की सुनवाई करने का फैसला किया है। इससे पहले भी कोर्ट ने राज्य सरकार को इस पर अपना जवाब देने के लिए कहा था।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने इस एक्ट को “बहुत सख्त” करार दिया। उन्होंने इस पर गंभीर चिंता जताई और इसकी कुछ धाराओं की समीक्षा करने पर ज़ोर दिया। कोर्ट ने अंतरिम आदेश में यह भी कहा था कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई दमनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

याचिकाकर्ता का दावा: दोहरी कार्रवाई का आरोप

याचिकाकर्ता का दावा है कि उस पर एक ही अपराध (गंगा नदी में अवैध खनन) के लिए दो बार एफआईआर दर्ज की गई है। वह इस कानून के तहत झूठे इल्ज़ामों का शिकार होने का आरोप लगाता है, जिससे साफ़ है कि कानून का दुरुपयोग हो सकता है।

राज्य सरकार का पक्ष

राज्य सरकार ने अधिनियम की धाराओं का बचाव करते हुए उन्हें उचित बताया है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को समझने से पहले पूरी जांच का फैसला किया है।

आगे क्या?

अब आगे की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट इस अधिनियम की संवैधानिक वैधता पर फैसला सुनाएगा। यह देखना होगा कि कोर्ट इस मामले में क्या निर्णय लेता है और क्या इसमें कुछ महत्वपूर्ण बदलाव होते हैं। इस मामले का असर न सिर्फ उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश में समान प्रकृति के कानूनों पर पड़ेगा।

Take Away Points:

  • सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश गुंडा एक्ट को “बहुत सख्त” और “क्रूर” बताया है।
  • कोर्ट ने इस एक्ट की कुछ धाराओं की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए हैं।
  • याचिकाकर्ता का दावा है कि उस पर एक ही अपराध के लिए दो बार एफआईआर दर्ज की गई है।
  • यह मामला महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे समान प्रकृति के कानूनों की वैधता पर प्रभाव पड़ेगा।

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