इलेक्ट्रीसिटी बिल के विरोध में राष्ट्रव्यापी हड़ताल

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 14 मार्च को लखनऊ और 03 अप्रैल को दिल्ली में होगा विशाल प्रदर्शन 
उप्र के बिजली कर्मचारी होंगे सम्मिलित 

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के प्रान्तीय सम्मेलन में शनिवार को प्रस्ताव पारित कर निर्णय लिया गया कि यदि केन्द्र सरकार इलेक्ट्रीसिटी (अमेन्डमेन्ट) बिल 2014 को बजट सत्र में पारित कराने हेतु प्रस्ताव लायेगी तो उसी दिन देश के तमाम बिजली कर्मचारियों व इन्जीनियरों के साथ उप्र के बिजली कर्मचारी व अभियन्ता एक दिन की हड़ताल/कार्य बहिष्कार करेंगे। सम्मेलन में यह निर्णय भी लिया गया कि केन्द्र व राज्य सरकारों की निजी घरानों पर अति निर्भरता की ऊर्जा नीति के विरोध में आगामी 14 मार्च को लखनऊ में प्रदर्शन व रैली की जायेगी तथा 03 अप्रैल को देश की राजधानी दिल्ली में विशाल प्रदर्शन व रैली की जायेगी।
बिजली कर्मचारियों व अभियन्ताओं की मुख्य मांगे – बिजली निगमों का एकीकरण कर उप्र राज्य विद्युत परिषद लिमिटेड का गठन किया जाये, इलेक्ट्रीसिटी (अमेन्डमेन्ट) बिल 2014 को वापस लिया जाये, सरकारी क्षेत्र के बिजली घरों का नवीनीकरण/उच्चीकरण किया जाये ओर निजी घरानों से बिजली खरीदने हेतु सरकारी क्षेत्र के बिजली घरों को बन्द करने की नीति समाप्त की जाये। विद्युत परिषद के विघटन के बाद भर्ती हुए सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेन्शन प्रणाली लागू की जाये, बिजली कर्मचारियों व अभियन्ताओं की वेतन व समयबद्ध वेतनमान की विसंगतियां दूर की जाये समस्त रिक्त पदों पर भर्ती की जाये और भर्ती में संविदा कर्मियों को वरीयता दी जाये।
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि घाटे के नाम पर उप्रराविप का विघटन किया गया था किन्तु वर्ष 2000 में सालाना घाटा जो 77 करोड़ रू था वह वर्ष 2016-17 तक 1000 गुना बढ़ कर 77000 करोड़ रू तक पहुंच गया है। 1993 में औद्योगिक क्षेत्र ग्रेटर नोएडा का विद्युत वितरण निजी कम्पनी नोएडा पावर कम्पनी लि को सौंपा गया था। करार के अनुसार निजी कम्पनी को विद्युत उत्पादन गृह स्थापित करना था जो आज तक नहीं हुआ। कम्पनी समय से पावर कारपोरेशन को बिजली खरीद का भुगतान नहीं कर रही है। इसी प्रकार आगरा की बिजली व्यवस्था 01 अप्रैल 2010 को निजी फ्रेन्चाईजी टोरेन्ट पावर को दी गयी। करार में भारी घोटाला हुआ और पावर कारपोरेशन को आगरा फ्रन्चाईजी से भारी क्षति हो रही है।
सम्मेलन को राम प्रकाश, राजीव सिंह, गिरीश पाण्डेय, महेन्द्र राय, सुहैल आबिद, बिपिन प्रकाश वर्मा, राजेन्द्र घिल्डियाल, करतार प्रसाद, पी एन तिवारी, भगवान मिश्र, परशुराम, ए के श्रीवास्तव, पी एन राय, शशि कान्त श्रीवास्तव, पवन श्रीवास्तव, पूसे लाल, विजय त्रिपाठी, शम्भू रत्न दीक्षित, राम सहारे वर्मा, पी एस बाजपेयी, जी पी सिंह ने सम्बोधित किया।

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