Yashwant Sinha ने जब सीएम से कहा, शराफत से पेश आइये मैं मुख्यमंत्री भी बन सकता हूं

डेस्क। Yashwant Sinha, President Election 2022 । बात उस समय की है जब बिहार के मुख्यमंत्री महामाया प्रसाद सिन्हा हुआ करते थे। यशवंत सिन्हा उस वक्त संताल परगना (अब बिहार का हिस्सा) में तैनात अपनी सेवा दे रहे थे।

बात दें कि एक दौरे के दौरान जब महामाया उनसे मुखातिब हुए तो वहां मौजूद लोगों ने युवा आइएएस अधिकारी यशवंत सिन्हा की शिकायत मुख्यमंत्री से करना आरंभ कर दिया। हर एक शिकायत पर उन्हें मुख्यमंत्री झिड़की लगाते और उनसे स्पष्टीकरण पूछ रहे थे। इसपर कमरे में मौजूद एक मंत्री ने आगे बढ़कर जब इन्हें डपटना चाहा तो वो तत्काल बोले कि मैं इस व्यवस्था का आदी नहीं और इतना कहने के बाद सिन्हा कमरे से बाहर निकल गए।

बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष के प्रत्याशी घोषित किए गए यशवंत सिन्हा ने अपनी आत्मकथा ‘रीलेंटलेस’ में इन घटनाओं का जिक्र भी किया है जिससे उनके नौकरशाही से राजनीतिक जीवन में आने की पृष्ठभूमि बनी। 

संताल परगना में हुई घटना के बाद बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री महामाया उनसे बहुत नाराज हो गए। और उन्होंने तत्काल में ही यशवंत सिन्हा को दूसरे कमरे में वापस बुलाकर ताकीद की कि इस प्रकार बात मत करें।

उन्होंने कहा कि मंत्री से आपको ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए था। इसपर यशवंत सिन्हा ने पलटकर कहा – मंत्री को भी ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए था। 

इसपर महामाया बाबू और भी नाराज हो गए और उन्होंने गुस्से में कहा – आपकी इस प्रकार सीएम से बात करने की हिम्मत कैसे हुई। आप दूसरी नौकरी खोज लीजिए। इसपर सिन्हा ने कहा कि मैं एक शरीफ आदमी हूं और मुझसे शराफत से पेश आया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि मैं सीएम बन सकता हूं, लेकिन आप आइएएस नहीं बन सकते।

अब उनके विपक्ष की ओर से दावेदार बनाए जाने के बाद से उनके कई किस्से लाइमलाइट में आ रहें हैं।

देखिए, यशवंत सिन्हा की प्रोफाइल

जन्म – 06 नवंबर 1937 को पटना, बिहार में फिर

आरंभिक पढ़ाई पटना में

1958 – राजनीतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर किया

1960 – आइएएस ज्वाइन 

24 वर्षों तक एसडीएम से लेकर विभिन्न प्रशासनिक पदों पर बने रहे। इस दौरान बान, जर्मनी स्थित भारतीय दूतावास, और फ्रैंकपर्ट में काउंसेल जनरल भी बनने का अवसर मिला। केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव, भूतल परिवहन मंत्रालय पद पर भी सेवा दी।

1984 में भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया और जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। 1986 में महासचिव भी बनाए गए।

1989 में जनता दल में शामिल हो गए। चंद्रशेखर के प्रधानमंत्रित्व काल में वो वित्त मंत्री के पद पर रहे।

1996 में भाजपा में आ गए, 1998 में हजारीबाग से सांसद निर्वाचित हुए, वित्त मंत्री बनें। 

फिर 2002 में विदेश मंत्री बनाए गए।

2004 में हजारीबाग संसदीय क्षेत्र से चुनाव हारे गए

फिर 2009 में जीत दर्ज की।

आंतरिक कारणों से 2018 में भाजपा से इस्तीफा दिया दे दिया । 

13 मार्च, 2021 को तृणमूल कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली फिर तृणमूल कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी बनाए गए।

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