पटना । सीबीआई अदालत ने मुजफ्फरपुर आश्रय गृह यौन शोषण मामले में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ जांच का आदेश दिया है। पोक्सो की एक विशेष अदालत ने यहां एक आरोपी अश्विनी की ओर से दायर आवेदन पर शुक्रवार को यह आदेश दिया। अदालत ने मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी धर्मेंद्र सिंह और समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव अतुल प्रसाद के खिलाफ भी जांच के आदेश दिए हैं।
अश्विनी पेशे से एक चिकित्सक है, जो कथित तौर पर यौन दुर्व्यवहार किए जाने से पहले बच्चियों को नशीली दवाएं देता था। अश्विनी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि सीबीआई जांच में उन तथ्यों को छुपाने की कोशिश कर रही है, जो मुजफ्फरपुर के पूर्व डीएम धर्मेन्द्र सिंह, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अतुल कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर के पूर्व डिवीजनल आयुक्त और मौजूदा प्रधान सचिव, समाज कल्याण विभाग और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिकाओं की जांच करने के बाद सामने आ सकते हैं।
इससे पहले 7 फरवरी को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए इस मामले की सुनवाई बिहार से नई दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। सुनवाई पटना से दिल्ली के साकेत पॉक्सो कोर्ट में ट्रांसफर कर दी गई थी। कोर्ट ने जज को आदेश दिया था कि दो हफ्ते के भीटर ट्रायल शुरू करें और 6 महीने के भीतर इसे खत्म करें।
अदालत ने मुजफ्फरपुर यौन उत्पीड़न मामले से जुड़े दस्तावेजों को दो सप्ताह के भीतर बिहार सीबीआई अदालत से साकेत निचली अदालत में स्थानांतरित करने को कहा था। इस दौरान कोर्ट ने आश्रय गृहों की देखभाल को लेकर बिहार सरकार की आलोचना की थी।
कोर्ट ने बिहार सरकार से कहा था, बस बहुत हो गया, बच्चों के साथ ऐसा बर्ताव नहीं किया जा सकता। बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह में 34 लड़कियों के साथ दुष्कर्म का खुलासा होने के बाद ही राजनीतिक बहस तेज हो गई थी। इस कांड का खुलासा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सांइसेज(टिस्स) की रिपोर्ट में हुआ। जब सरकार पर विपक्षी पार्टियों और लोगों का दबाव बढ़ा तो इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की गई।
Leave a Reply