अकोला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र माेदी ने कहा है कि आप सभी ने हमेशा मुझे और महायुती के साथियों को भरपूर आशीर्वाद दिया है। आज मैं आपके सामने पहले से ज्यादा मजबूत सरकार बनाने के लिए, मजबूत इरादों वाली सरकार बनाने के लिए, आपके साथ मजबूती से खड़ी रहने वाली सरकार बनाने के लिए, आपसे आशीर्वाद लेने आया हूं।
यह बात प्रधानमंत्री मोदी आज महाराष्ट्र के अकाेला में जनसभा को संबोधित करते हुए कही। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ये वीर सावरकर के ही संस्कार हैं कि राष्ट्रवाद को हमने राष्ट्र निर्माण के मूल में रखा है। वहीं दूसरी तरफ वो लोग हैं जिन्होंने बाबा साहेब का कदम-कदम पर अपमान किया, उन्हें दशकों तक भारत रत्न से दूर रखा। ये वो लोग हैं जो वीर सावरकर का अपमान करते हैं।
प्रधानमंत्री माेदी ने कहा कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बाबा साहब अंबेडकर के संविधान को पूरी तरह लागू न करने के प्रयासों के पीछे भी ऐसे ही लोगों की दुर्भावना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अकोला के लोगों ने मोरना नदी को साफ करनी की जो मुहिम चलाई है वो प्रसंशनीय है। मैंने मन की बात कार्यक्रम में भी इस बात का जिक्र कर लोगों से प्रेरणा लेने की अपील की थी। बैराज बनाने का काम हो, जलयुक्त शिवार हो, पूरी निष्ठा के साथ इस क्षेत्र का विकास हुआ है। बीते 5 वर्ष में बिजली के क्षेत्र में केंद्र और महाराष्ट्र की सरकार ने अभूतपूर्व काम किए हैं। इसी का परिणाम है कि अब अकोला को, महाराष्ट्र को पर्याप्त बिजली मिल पा रही है।
गरीबों को सौभाग्य योजना के तहत मुफ्त में बिजली कनेक्शन मिले हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन्हें एक भारत-श्रेष्ठ भारत नहीं चाहिए। इन्हें बंटा भारत चाहिए, बिखरा भारत चाहिए, लड़ता हुआ भारत चाहिए। यही इनकी राजनीतिक चालें हैं, जो आज चौपट होती जा रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने से आप सभी खुश हैं, लेकिन उनका चेहरा उतर गया है, उन्हें दर्द हो रहा है। जैसे पाल-पोसकर कर रखा जाने क्या चला गया। इनके द्वारा संभाल के रखी 370 देशवासियों के चरणों में न्यौछावर हो गई।
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मोदी ने कहा कि मैं हैरान हूं कि छत्रपति शिवाजी की धरती पर आजकल राजनीतिक स्वार्थ के कारण ऐसी आवाजें उठायी जा रही हैं और इनकी बेशर्मी देखिये कि ये खुलेआम कह रहे हैं कि महाराष्ट्र के चुनाव से अनुच्छेद 370 का क्या लेना देना? महाराष्ट्र से जम्मू कश्मीर का क्या संबंध?।महाराष्ट्र का कोई जिला ऐसा नहीं होगा जहां से गए वीर सैनिकों ने जम्मू-कश्मीर की शांति के लिए त्याग नहीं किया होगा। महाराष्ट्र के वीर जवान के दिल में यही बात रही होगी कि मैं छत्रपति शिवाजी महाराज की धरती से आया हूं, मैं देश पर आंच भी नहीं आने दूंगा।
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