ड्राइवर अंकल दूसरी गाड़ी मंगवा लीजिए, चुपचाप धक्का लगाओ 

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 गोसाईगंज  निगोहा  शायद ही  ऐसे मां बाप हो  जो अपने बच्चों को सुरक्षित ढंग से स्कूल पहुंचने और घर वापस आने की चिंता न सताती हो  बच्चों के लिए दो घर दो परिवार होते हैं सुबह पहले घर  से चलकर  दूसरे घर व परिवार में जाते हैं लेकिन दूसरा परिवार तो बच्चों की सुरक्षा को लेकर बिल्कुल भी  फिकरमंद नहीं दिखता  स्कूल प्रशासन को यह भी चिंता नहीं  की स्कूल आने वाले बच्चे सुरक्षित पहुंच रहे हैं या नहीं क्या परेशानी है क्या समस्याएं आ रही है इससे स्कूल प्रशासन से कोई मतलब नहीं है उनको तो बस अपनी फीस से मतलब है 
नियम और कानून के खिलाफ खटारा हो चुकी  स्कूल  वैनों  को सड़क पर दौड़ाया जा रहा
मामला निगोहा  नगराम मोड स्थित गैलेक्सी स्कूल का है यहां के स्कूल में खटारा वैन ही संचालित की जाती है जो कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकती हैं और बच्चों को अपनी जान देकर कीमत चुकानी पड़ सकती है सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार की सुबह गैलेक्सी स्कूल कि वैन up 32 cu 2300 बच्चों को लेकर स्कूल आ रही थी कि अचानक   वैन  बंद हो गई ड्राइवर ने कई बार कोशिश की लेकिन गाड़ी स्टार्ट नहीं हुई उधर स्कूल पहुंचने की जल्दबाजी में ड्राइवर को कुछ सूझ नहीं रहा था काफी देर के बाद ड्राइवर ने वैन में बैठे  मासूम बच्चों को गाड़ी से बाहर   उतारने को कहा  वैन चालक ने खटारा हो चुकी गाड़ी में धक्का लगाने का फरमान जारी कर दिया और मासूम बच्चों ने अपने ड्राइवर अंकल के आदेशों का पालन किया और सभी बच्चे मिलकर वैन को धकेलने लगे लेकिन दम तोड़ चुकी मारुति वैन  स्टार्ट नहीं हो पाई जिसके बाद चालक ने फिर बच्चों से कहा एक बार और धकेले पसीने से लथपथ हो चुके बच्चे चालक से बोले अंकल दूसरी गाड़ी मंगा लीजिए स्कूल के लिए देर हो रही है यह स्टार्ट नहीं होगी चालक ने कहा एक बार और धक्का दीजिए गाड़ी स्टार्ट हो जाएगी धक्का देने पर  मारुति वैन स्टार्ट हो गई  तब जाकर बच्चों को बैठाकर स्कूल पहुंचाया गया ऐसे में कैसे कहा जा सकता है कि बच्चे गाड़ी से सुरक्षित स्कूल आते जाते हैं
 
गोसाईगंज मोहनलालगंज में  भी स्कूलों में खटारा वाहनों की भरमार
खटारा वाहनों के बात करे तो मोहनलालगंज और गोसाईगंज में भी कई  स्कूलों में खटारा वाहनों की भरमार है यहां  के ज्यादातर स्कूलों के निजीें वाहनों के संचालित होने के साथ ही स्कूल संचालक प्राइवेट वाहनों को भी लगाए हैं जो कि मानकों  की धज्जियां उड़ा कर बच्चों को दम तोड़ चुके  वाहनों  में ठोस ठोस कर भरते हैं यही नहीं  अंदर जगह नहीं बची तो बाहर भी लटका कर स्कूल ले जाते हैं ऐसे में कभी भी कोई बड़ी घटना घटित हो सकतीं हैं निर्धारित संख्या से कई गुना ज्यादा बच्चे वाहन में  बैठे देखे जा सकते हैं और परिवहन विभाग समय-समय पर नियमों का पालन करने के  आदेशों और कार्रवाई की बात करता है
 
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्कूल में लगे खटारा वाहनों की बढ़ती घटनाओं को लेकर  कुछ इस तरह एडवाइजरी की
[1]    स्कूली वाहनों में फास्ट एंड की व्यवस्था
[2]    प्रत्येक वाहनों में फायर एक्सटिंग्विशर लगाएं
[3]  वाहनों के आगे पीछे स्कूल बस व वैन  अंकित हो
[4] एजेंसी से अनुबंध पर   लिए गए वाहनों पर आँन स्कूल ऑन ड्यूटी लिखें
[5] स्कूल वाहनों में सीट क्षमता के अनुरूप ही छात्र को बैठाए है
[6 ]प्रत्येक स्कूल वाहन में हॉरिजेंटल ग्रिल लगवाएं
[7] वाहनों पर स्कूल का नाम और टेलीफोन नंबर  अवश्य  लिखें
[8] बसों के दरवाजे को अंदर से बंद करने की व्यवस्था करें
[9] एक बस चालक को कम से कम 5 साल का भारी वाहन चलाने का अनुभव प्राप्त हो
[10]  वाहन चालक के अलावा एक  उपचालक होना जरूरी है
[11] वाहन में बैग रखने के लिए सीट के नीचे व्यवस्था होना चाहिए [12] जिस वाहन में बच्चे आते हैं उसमें टीचर हो जो बच्चों पर नजर रख सके
 
 
प्रशासन भी दे चुका यह आदेश
स्कूली बसों को लेकर प्रशासन भी दे चुका है  कई अहम आदेश
आदेश कुछ इस प्रकार हैं
[ 1] स्कूल वाहन पर ड्राइवर व कंडक्टर का नाम वाहन का फिटनेस व बीमा की अंतिम तिथि अवश्य लिखें
[2] वाहन चालक कक्ष में टीवी रेडियो ना लगाएं
[3] स्कूली वाहनों से दूसरे कार्य न कराए जाएं
[4] स्कूली वाहनों में शिकायत पुस्तिका जरूर रखें
[5] वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग कतई ना करें
लेकिन यह बातें तो सिर्फ आदेशों पर दिखाई और सुनाई पडते हैं हकीकत कुछ और ही बयां कर रही हैं
 
अभिभावक बोले
बच्चों को खटारा हो चुकी बस व मारुति वैन में भेजना अब खतरा  बनता जा रहा है अगर स्कूल वाहन खटारा है तो किसी भी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है प्रशासन को अभियान चलाकर इस पर रोक लगानी चाहिए अगर तब भी ना माने तो स्कूल प्रशासन खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए
 
 
स्कूल संचालक में नहीं उठाया था
स्कूल की खटारा मारुति वैन में छात्रों से धक्का लगाने के मामले में जब स्कूल संचालक से बात करने के लिए फोन लगाया गया उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया गया ऐसे में कहा जा सकता है कि बच्चों की सुरक्षा अब भगवान भरोसे है

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