प्रदेश को पॉलिथीन कचरे से मुक्त करने के अभियान में 2.92 लाख स्वयं सहायता समूहों की 30 लाख महिलाएं जुड़ेंगी। ये महिलाएं ग्रामीणों को जागरूक करने के साथ ही पॉलिथीन के विकल्प के रूप में कपड़े के बैग, झोले, कागज से बनने वाले लिफाफे आदि का निर्माण करेंगी। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन इन्हें प्रशिक्षण दिलाने के साथ ही अन्य तकनीकी सहयोग देगा।
उ.प्र. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक के. रविंद्र नायक ने एसएचजी के महिलाओं को सहयोग देने के लिए सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है। लिखा है कि एसएचजी से जुड़ी महिलाएं सिलाई जानती हैं। इन्हें प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से कपड़े के बैग की सिलाई और प्रिंटिग का प्रशिक्षण दिलाया जाए। इनके द्वारा तैयार सामानों की मार्केटिंग के लिए मॉल, दुकानदारों आदि से जोड़ने का प्रयास जनपद स्तर पर किया जाए। उद्योग बंधु की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा कर पालीथीन मुक्त उत्तर प्रदेश में सहयोग की अपील की जाए।
प्रभातफेरी निकालेंगे: प्लास्टिक मुक्ति अभियान के तहत दो अक्तूबर को एसएचजी की महिलाएं टोली बनाकर गांवों में पॉलिथीन इक्ट्ठा करने के लिए प्रभारफेरी निकालेंगी। मिशन निदेशक के रविंद्र नायक का कहना है कि इस अभियान से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
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