ट्रांसफर-पोस्टिंग में मंत्री जी आगे, लेकिन प्राचार्यों के 267 रिक्त पद भरने में फिसड्‌डी

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जयपुर । राजस्थान के 292 राजकीय कॉलेजों में से अभी वर्तमान में 290 कॉलेज संचालित है, लेकिन शर्मनाक बात यह है कि विभागीय पदोन्नति नहीं होने की वजह से प्राचार्यों के 267 पद रिक्त है। राजस्थान विधानसभा में लगे एक सवाल से यह खुलासा हुआ है। जवाब में बताया गया है कि नियम, 1986 में संशोधन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन होने से, विभागीय पदोन्‍नति समिति की बैठक आयोजित नहीं होने के कारण प्राचार्य के पद रिक्‍त है।
उच्च शिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी ने यूं तो ताबड़तोड़ तबादले करने में आगे रहे, लेकिन राजकीय कॉलेजों के प्राचार्यो के पद भरने के लिए विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित नहीं करवा सके।
अगर विधानसभा में पेश जिलेवार आंकड़ें देखें तो अजमेर जिले के राजकीय कॉलेजों में 11 प्राचार्यों के पद स्वीकृत है, लेकिन यहां पर 9 पद रिक्त है। इसी तरह अलवर में 16 पद है, लेकिन रिक्त 12, बांसवाड़ा में 4 पद है, लेकिन चारों ही खाली है। बारां में 8 पद है, लेकिन यह भी रिक्त है। बाड़मेर में 10 पद है, लेकिन यह भी रिक्त है। भरतपुर में 12 प्राचार्यों के पद है, लेकिन यह भी खाली है। भीलवाड़ा में 11 पदों में से 10 पद रिक्त है। बूंदी में 3 पदों में 2 पद रिक्त चल रहे है। चित्तौड़गढ़ में 8 प्राचार्यों के पद है, जो रिक्त है। चूरू में भी 12 के 12 पद खाली है। दौसा के 10 पदों में से 9 पद खाली है। धौलपुर में 7, डूंगरपुर में 5, हनुमानगढ़ में 4 प्राचार्यों के पद है, जो की रिक्त चल रहे है। इसी तरह जयपुर जिले में 19 पद है, इनमें से 14 पद रिक्त है। जैसलमेर में 4, जालौर में 7, झालावाड़ में 8, झुुंझुनूं में 7, जोधपुर में 13, नागौर में 11, पाली में 10, प्रतापगढ़ में 5, राजसमंद में 9, सवाईमाधोपुर में 6 प्राचार्यों के पद स्वीकृत है,जो सभी रिक्त चल रहे है। करौली जिले में 7 पद स्वीकृत है, जो सभी रिक्त चल रहे है। सीकर में 11 पद स्वीकृत है, इसमें से 9 पद रिक्त चल रहे है। कोटा में 11 पद है, जिसमें से 8 पद रिक्त चल रहे है। सिरोही में 7 पदों में से 6 पद रिक्त चल रहे है । श्रीगंगानगर में 6 पद स्वीकृत है, लेकिन यहां पर 4 पद रिक्त चल रहे है। टोंक में 8 प्राचार्यों के पद स्वीकृत है, लेकिन यहां भी 7 पद रिक्त चल रहे है। इसी तरह उदयपुर जिले में 11 पद रिक्त है, जिसमें से 9 रिक्त चल रहे है।

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