अहमदाबाद। मौसम विभाग के मुताबिक ‘वायु के 13 जून को गुजरात के तटीय इलाकों पोरबंदर और कच्छ क्षेत्र में पहुंचने की संभावना है। इस बीच हालात से निपटने और तकरीबन 3 लाख लोगों का रेस्क्यू कराने के लिए सेना और एनडीआरएफ ने कमर कस ली है। अरब सागर से उठा चक्रवाती तूफान वायु पश्चिमी तट की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इस बीच चक्रवात का असर महाराष्ट्र में दिखने लगा है। मुंबई में तेज हवाओं की वजह से कई पेड़ गिर गए। यह महाराष्ट्र से उत्तर में गुजरात की ओर बढ़ रहा है।
इससे पहले पिछले महीने आए फोनी तूफान से ओडिशा में काफी तबाही हुई थी। जिससे सबक लेते हुए स्थानीय लोगों और मछुआरों को कच्छ में समुद्र तट के पास रहने वाले जगहों पर एनडीआरएफ के जवानों ने सुरक्षित पहुंचाया। इसके अलावा दीव में पुलिस और प्रशासन की मदद से 65 लोगों को सुरक्षित निकालकर साइक्लोन रिलीफ सेंटरों में शिफ्ट किया गया है। इसके अलावा वलसाड में भी वायु चक्रवात को देखते हुए अलर्ट जारी किया गया है। तटीय इलाके के पास स्थित गांवों में 39 स्कूलों को बंद किया गया है। फायर डिपार्टमेंट के साथ ही रेस्क्यू टीम को भी अलर्ट पर रखा गया है।

वेरावल, ओखा, पोरबंदर, भावनगर, भुज और गांधीधाम स्टेशनों की ओर शाम छह बजे के बाद 14 जून की सुबह तक सभी पैसेंजर, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन रद्द रहेगा। इस दौरान लोगों को रेस्क्यू में मदद पहुंचाने के लिए इन सभी स्टेशनों पर एक-एक स्पेशल ट्रेन मौजूद रहेगी। मुंबई में मौसम विभाग के उप महानिदेशक (डीडीजी) केएस होसलिकर का कहना है, काफी तेज चक्रवाती तूफान अभी मुंबई से 280 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पश्चिम क्षेत्र तक पहुंच चुका है। महाराष्ट्र के उत्तरी तट पर इसकी वजह से 50-60 से लेकर 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दिनभर हवाएं चलेंगी।

महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में 12 और 13 जून को समुद्र के किनारे हालात खराब हो सकते हैं। समुद्र के बीच पर खास ध्यान देने की जरूरत है। मछुआरों को चेतावनी जारी की जा चुकी है। तेज हवाओं की वजह से पेड़ गिरने की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ इलाके में मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है।
यहां वायु चक्रवात की रफ्तार 110 से 135 किमी प्रति घंटे तक हो सकती है। इसका लैंडफॉल (समुद्र तट से टकराने का स्थान) सौराष्ट्र तट के करीब होने का अनुमान है। अभी चक्रवात अपनी वर्तमान स्थिति से उत्तर की ओर (कोंकण तट से) सौराष्ट्र के पोरबंदर और महुवा के बीच बढ़ रहा है। चक्रवाती तूफान की वजह से कच्चे मकानों और कमजोर इमारतों को नुकसान, बिजली सप्लाइ प्रभावित होने के साथ ही निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका जताई जा रही है।
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