गया। ब्लैक राइस में कार्बोहाईड्रेड की मात्रा कम होने के कारण यह शूगर के रोगियों के लिए भी लाभकारी होता है। हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, हाईकॉलेस्ट्राल, आर्थराइटिस और एलर्जी में भी ब्लैक राइस लाभकारी है।
ब्लैक राइस डायबिटीज के अलावे अन्य कई बीमारियों में भी लाभकारी है। इस चावल में कई सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं। एक महीना इस्तेमाल के बाद ही फायदा दिखने लगता है। इनमें प्रोटीन, विटामिन और कई तरह के खनिज पाए जाते हैं जो हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट की भरपूर मात्रा होती है। इन चावलों मे फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पेट की बीमारियों से बचाती है। इनमें पाया जाने वाला खास तत्व हृदय की बीमारियों में भी लाभकारी है।
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डायबिटीज मेलेटस (डीएम), जिसे सामान्यतः मधुमेह कहा जाता है, मधुमेह में खून में शुगर का स्तर बढ़ जाता है। इसका मुख्य कारण अग्न्याशय द्वारा पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करना है। यदि इसका इलाज नहीं किया जाए तो हृदय रोग, स्ट्रोक, किडनी की बीमारी, अल्सर और आंखों को नुकसान आदि हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में मौत तक हो सकती है।
आज बाजार में जैविक विधि से तैयार ब्लैक राइस की कीमत छह सौ रुपये प्रति किलो है जबकि इसके बीज की कीमत 1500 से 1800 रुपये प्रति किलो है। किसान नरेंद्र मेहरा का दावा है कि ब्लैक राइस का प्रति एकड़ 18 से 20 क्विंटल तक उत्पादन किया जा सकता है। इसकी फसल भी केवल 135 से 1490 दिन में पककर तैयार हो जाती है और सिंचाई के लिए भी ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती है।
ब्लैक राइस की खेती पश्चिम बंगाल के बाद पहली बार बिहार के मगध प्रक्षेत्र में भी शुरू की गई है। गया जिले के बेलागंज प्रखंड के कचनामा गांव निवासी डॉ. विकास कुमार शर्मा ने प्रयोग के तौर पर 15 कट्ठा खेत में ब्लैक राइस की खेती की है। वे पेशे से आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं।
डॉ. विकाश ने बताया कि बगैर किसी रासायनिक खाद और कीटनाशक दवा के ब्लैक राइस की खेती की है। सामान्य धान के मुकाबले 30 फीसद कम पानी में ब्लैक राइस की खेती की जा सकती है। इसके काले रंग के धान में चावल का दाना भी काला होता है।
किसानों के मुताबिक, प्रदेश सरकार काले चावल के उत्पादन को बढ़ावा दे और उत्पादन के लिए किसानों को जागरुक करें, जिससे किसानों की आय में खासा वृद्धि होगी. उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्रदेश सरकार उत्तराखंड के किसानों को काला चावल का बीज उपलब्ध कराए, जिससे किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकें।
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