इंदौर । अफगानी मूल की मानी जाने वाली आम की प्रजाति नूरजहां के गिने-चुने पेड़ मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में ही पाए जाते हैं। मध्य प्रदेश का यह इलाका गुजरात से सटा है। इंदौर से करीब 250 किलोमीटर दूर कट्ठीवाड़ा में इस प्रजाति की खेती इसबार अनुकूल मौसमी हालात के चलते नूरजहां के पेड़ों पर खूब बौर (आम के फूल) आए और फसल भी अच्छी हुई।
नूरजहां के फलों का वजन औसतन 2.75 किलोग्राम के आस-पास रहा, जबकि गुजरे तीन सालों में इनका औसत वजन तकरीबन 2.5 किलोग्राम रहा था। आमों की मलिका के रूप में मशहूर किस्म नूरजहां के फलों का औसत वजन इस बार मौसम की मेहरबानी से बढ़कर 2.75 किलोग्राम पर पहुंच गया है। यही वजह है कि आम की इस दुर्लभ किस्म के मुरीद इसके केवल एक फल के लिए 1,200 रुपये तक चुका रहे हैं।
इस बार अच्छी फसल के चलते जहां नूरजहां के स्वाद के शौकीन खुश हैं, वहीं इसके विक्रेताओं की भी पौ बारह हो गई है। इन दिनों नूरजहां का केवल एक फल 700 से 800 रुपये में बिक रहा है। ज्यादा वजन वाले फल के लिए 1,200 रुपये तक भी चुकाए जा रहे हैं।
नूरजहां के पेड़ों पर जनवरी से बौर आने शुरू होते हैं और इसके फल जून के आखिर तक पककर तैयार होते हैं। नूरजहां के फल तकरीबन एक फुट तक लम्बे हो सकते हैं। इनकी गुठली का वजन 150 से 200 ग्राम के बीच होता है।
बहरहाल, किसी जमाने में नूरजहां के फल का औसत वजन 3.5 से 3.75 किलोग्राम के बीच होता था। जानकारों के मुताबिक, पिछले एक दशक के दौरान मॉनसूनी बारिश में देरी, अल्पवर्षा, अतिवर्षा और आबो-हवा के अन्य उतार-चढ़ावों के कारण नूरजहां के फलों का वजन पहले के मुकाबले घट गया है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण आम की इस दुर्लभ किस्म के वजूद पर संकट भी मंडरा रहा है।
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