नई दिल्ली। कांग्रेस नेता आनन्द कुमार ( Congress leader anand Sharma ) ने राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल पर बोलते हुए कहा है कि सुना है हमारे धर्म में पुनर्जन्म को मानते हैं। तो बुजुर्ग कभी मिलते हैं… अगर सरदार पटेल कभी आपके प्रधानमंत्री जी को मिल लिए तो बहुत नाराज होंगे। यह मैं कह सकता हूं। गांधी जी तो दुख होंगे ही कि मेरे 150 साल मना रहे हो और ऐसा करते हो। गांधी जी का चश्मा और उनका नाम विज्ञापन के लिए नहीं है। मेरा आग्रह है उनके चश्मे से हिंदुस्तान को देखो, समाज को और दुनिया को देखो। आपका कैब उससे टकराता है।
आनंद शर्मा ने आगे कहा कि पहले और अब के बिल में काफी अंतर है, सबसे बात करने का जो दावा किया जा रहा है उससे मैं सहमत नहीं हूं। इतिहास इसको कैसे देखेगा, उसे वक्त बताएगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि इस बिल को लेकर जल्दबाजी क्यों हो रही है, संसदीय कमेटी के पास इसे भेजा जाता और तब लाया जाता। आनंद शर्मा ने कहा कि 72 साल में ऐसा पहली बार हुआ है, ये विरोध के लायक ही है। ये बिल संवैधानिक, नैतिक आधार पर गलत है, ये बिल प्रस्तावना के खिलाफ है। ये बिल लोगों को बांटने वाला है, हिंदुस्तान की आजादी के बाद देश का बंटवारा हुआ था, तब संविधान सभा ने नागरिकता पर व्यापक चर्चा हुई थी। बंटवारे की पीड़ा पूरे देश को थी, जिन्होंने इसपर चर्चा की उन्हें इसके बारे में पता था।
आनंद शर्मा ने आगे कहा कि यह बिल संविधान निर्माताओं पर सवाल उठाता है, क्या उन्हें इसके बारे में समझ नहीं थी। भारत के संविधान में किसी के साथ भेदभाव नहीं हुआ, बंटवारे के बाद जो लोग यहां पर आए उन्हें सम्मान मिला है, पाकिस्तान से आए दो नेता प्रधानमंत्री भी बने है।टू नेशन थ्योरी कांग्रेस पार्टी ने नहीं दी थी, वो सावरकर ने हिंदू महासभा की बैठक में दी थी। आनंद शर्मा ने कहा कि गृह मंत्री ने बंटवारे का आरोप उन कांग्रेसी नेताओं पर लगाया जिन्होंने जेल में वक्त गुजारा, ये राजनीति बंद होनी चाहिए।
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