देश में डेल्टा प्लस की दस्तक के बाद इस पर शोध करने वाले चिकित्सकों ने पाया है कि यह स्वरूप बेहद घातक है। संक्रमित मरीजों पर हुए शोध के बाद पाया गया कि यह वायरस शरीर में बीमारी के खिलाफ बने एंटीबॉडी को बहुत तेजी से खत्म करने लगता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह प्रक्रिया बेहद खतरनाक है। डेल्टा प्लस वैरिएंट के अब तक अपने देश में 40 से ज्यादा नए मामले आ चुके हैं जबकि एक मरीज की मौत भी हो चुकी है। यही वजह है कि आईसीएमआर और नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वॉयरोलॉजी ने मिलकर डेल्टा प्लस पर शोध करना शुरू कर दिया है।
क्या है डेल्टा प्लस वेरिएंट ?
यह नया स्वरूप डेल्टा प्लस (एवाई.1) भारत में सबसे पहले सामने आए डेल्टा (B.1.617.2) में म्यूटेशन से बना है। इसके अलावा K41N नाम का म्यूटेशन जो दक्षिण अफ्रीका में बीटा वेरिएंट में पाया गया था उससे भी इसके लक्षण मिलते हैं। इसलिए यह ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय की मानें तो देश में डेल्टा प्लस वेरियंट के 40 मामले सामने आ चुके हैं। ये 40 मामले 8 राज्यों में पाए गए हैं। ये राज्य महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल, पंजाब, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, जम्मू और कर्नाटक हैं।
WHO ने डेल्टा वेरिएंट को ‘वायरस ऑफ कंसर्न’ करार दिया है।डेल्टा प्लस पर शोध करने वाली टीम के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि उनका मकसद इस शोध में यह जानना है कि यह वैरिएंट दुनियाभर में मिले अब तक अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा के मूल स्वरूप से कितना अलग है। जिनोम सीक्वेंसिंग से इसकी पहचान तो हो गई है लेकिन इसके खतरनाक स्तर का अब तक पूरा अंदाजा नहीं लगा है। शोध करने वाली टीम ने बताया कि फिलहाल शुरुआती दौर में इस बात का जरूर पता लगा है कि डेल्टा प्लस शरीर में बनी हुई एंटीबॉडी को खत्म करने लगता है।
अगर ऐसा है तो यह बेहद खतरनाक है। क्योंकि लोगों को दिए जाने वाली वैक्सीन से शरीर में रोग के खिलाफ लड़ने की एंटीबॉडी बनने लगती हैं।क्योंकि डेल्टा प्लस के संक्रमित मरीजों के मिलने का सिलसिला लगातार जारी है, लेकिन जिस तरीके से यह संक्रमण एक दूसरे में ट्रांसफर होना चाहिए उसकी गति बहुत कम दिख रही है।
डेल्टा वेरिएंट के लक्षण-
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक डेल्टा प्लस काफी संक्रामक है और फेफड़े की कोशिकाओं के रिसेप्टर से मजबूती से चिपकने में सक्षम है। इसकी वजह से फेफड़े को जल्द नुकसान पहुंचने की संभावना होती है। साथ ही यह मोनोक्लोनल एंडीबॉडी कॉकटेल को भी मात देने में सक्षम है। कोविड लक्षणों पर स्टडी करने वाले प्रमुख शोधकर्ता प्रो. टिम स्पेक्टर (Tim Spector) के अनुसार, जिन लोगों को डेल्टा वेरिएंट ने अपनी चपेट में लिया है, उन्हें तेज खांसी (Bad Cold) और अलग ही तरह की भावना जैसे फनी ऑफ फीलिंग का अहसास हो रहा है। उनका कोल्ड सिम्टम्स पिछले वायरस से काफी अलग पाया जा रहा है। अध्ययन के अनुसार, सिरदर्द, गले में खराश और नाक बहना डेल्टा वेरिएंट से जुड़े सबसे आम लक्षण हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय की माने तो मोटे तौर पर दोनों भारतीय टीके कोविशील्ड और कोवैक्सीन डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी हैं, लेकिन वे किस हद तक और किस अनुपात में एंटीबॉडी बना पाते हैं, इसकी जानकारी बहुत जल्द साझा की जाएगी। डेल्टा प्लस वेरिएंट से बचाव में टीके कितने प्रभावी हैं, इस पर भारत सहित विश्व के कई देशों में अध्ययन हो रहा है।
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