क्रिकेट के इतिहास में दो बार हुए हैं टाई मैच! जानें कैसे?
क्या आप जानते हैं कि क्रिकेट के इतिहास में केवल दो बार ही मैच टाई हुए हैं? जी हाँ, आपने सही सुना! आज हम आपको उन दो ऐतिहासिक मैचों के बारे में बताएँगे, जिनमें न तो किसी टीम की जीत हुई और न ही किसी की हार। ये मैच थे क्रिकेट के रोमांचकारी पलों में से एक।
पहला टाई टेस्ट मैच: ऑस्ट्रेलिया बनाम वेस्टइंडीज (1960)
14 दिसंबर 1960 को ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर खेले गए इस मैच ने क्रिकेट इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा। वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 453 रन बनाए, जिसमें गैरी सोबर्स के 132 रन सबसे उल्लेखनीय थे। ऑस्ट्रेलिया ने जवाब में नॉर्म ओ’नील के 181 रनों की मदद से 505 रन बनाकर 52 रनों की बढ़त बना ली।
वेस्टइंडीज की दूसरी पारी 284 रनों पर समाप्त हुई, जिससे ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 233 रनों का लक्ष्य मिला। लेकिन, ऑस्ट्रेलिया ने 6 विकेट 92 रनों पर गंवा दिए थे। तब ऐसा लग रहा था कि वेस्टइंडीज आसानी से जीत हासिल कर लेगी।
लेकिन, एलन डेविडसन और कप्तान रिची बेनो ने शानदार साझेदारी करते हुए 7वें विकेट के लिए 134 रन जोड़े। हालांकि, डेविडसन 80 रन बनाकर रन आउट हो गए।
आखिरी ओवर में ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 6 रन चाहिए थे और उसके 3 विकेट बाकी थे। वेस हॉल के द्वारा फेंके गए इस ओवर में केवल 5 रन बने और ऑस्ट्रेलिया के तीनों विकेट गिर गए, जिससे मैच टाई हो गया। यह क्रिकेट इतिहास का पहला टाई मैच था।
दूसरा टाई टेस्ट मैच: भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया (1986)
साल 1986 में मद्रास (अब चेन्नई) में खेले गए भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट मैच ने भी क्रिकेट इतिहास में अपनी जगह बनाई। यह क्रिकेट का दूसरा और आखिरी टाई टेस्ट मैच है। रोमांचक और यादगार मुकाबला था जिसमें दोनों टीमों के प्रदर्शन का उच्च स्तर देखने को मिला। ध्यान देने वाली बात है कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी बॉब सिम्पसन दोनों टाई टेस्ट मैचों के गवाह रहे – पहले खिलाड़ी के रूप में और दूसरे में कोच के रूप में।
टाई मैच: क्रिकेट के रोमांच और अनिश्चितता का परिचय
टाई मैच क्रिकेट के सबसे अनोखे नतीजों में से एक हैं। ये न सिर्फ दर्शकों के लिए रोमांच से भरपूर होते हैं बल्कि खिलाड़ियों के लिए भी यादगार बन जाते हैं। टाई मैच खेल की अनिश्चितता को दिखाते हैं और बताते हैं कि एक बॉल पर मैच का रुख कितनी आसानी से बदल सकता है।
क्यों ज़्यादा टाई मैच नहीं होते?
यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण है। क्रिकेट में अक्सर आखिरी तक खेल का नतीजा अनिश्चित ही रहता है लेकिन टाई के नतीजे बहुत कम ही देखने को मिलते हैं। यह कुछ कारणों से ऐसा होता है, जैसे मैचों में आम तौर पर 2 इनिंग होती हैं, और जीत के लिए ज़रूरी रनों की संख्या अधिक होती है। एक बड़ा स्कोर बनाना बहुत आसान नहीं है। इसलिए कम ही मौके मिलते हैं जब किसी टीम के सामने सिर्फ एक पारी में 150 से 200 रन का लक्ष्य हो और टाई का नतीजा निकले।
क्रिकेट के अनोखे टाई मैचों का महत्व
क्रिकेट इतिहास में टाई मैचों का बहुत महत्व है। यह इस खेल की रोमांचक और अनिश्चित प्रकृति का ही प्रतिनिधित्व करते हैं। ये याद दिलाते हैं कि मैच आखिरी बॉल तक जीता या हारा जा सकता है। इन टाई मैचों ने खेल को और भी अधिक मनोरंजक और अप्रत्याशित बनाया है।
टाई मैच: खेल की अनिश्चितता का प्रतीक
क्रिकेट में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं जहां नतीजा अनिश्चित रहता है। लेकिन टाई मैच इन अनिश्चितताओं का ही चरम बिंदु है। खेल के परिणाम की इस अनिश्चितता को ध्यान में रखकर खेल को आगे भी और भी रोमांचक बनाने की कोशिशें चलती रहती हैं।
Take Away Points
- क्रिकेट के इतिहास में केवल दो ही टाई मैच खेले गए हैं।
- टाई मैच खेल के अनिश्चित और रोमांचक पहलू को उजागर करते हैं।
- इन मैचों ने खेल में एक अलग ही उत्साह और रोमांच भर दिया है।

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