बरेली। देश का कानून क्या सिर्फ आम जनता पर ही लागू होता है। जनता अगर कानून तोड़े तो उसे सजा मिलती है और अगर कोई माननीय कानून को तोड़ता है तो उसे अनदेखा कर दिया जाता है और उसे कानून तोड़ना नहीं माना जाता है। लेकिन देश का कानून तो हर नागरिक पर समान रूप से लागू होता है तो फिर माननीय पर यह क्यों लागू नहीं होता ? यह सवाल सीबीगंज के गांव खड़ौआ में कान्हा पशु आश्रय गृह का उद्घाटन करने आए नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना अपने पीछे छोड़ गए हैं।
दरअसल जिस वक्त मंत्री का काफिला खड़ौआ पहुंचा, वहां रेलवे क्रॉसिंग बंद था। क्रॉसिंग खुलने का इंतजार किए बगैर ही सुरेश खन्ना झुककर उसके नीचे से क्रॉसिंग पार करने लगे तो हड़बड़ाए गेटमैन ने फाटक ही खोल दिया और मंत्री उनके पीछे मेयर उमेश गौतम, नगर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव समेत कई सरकारी अफसर भी क्रॉसिंग पार कर गए।
मगर कुछ ही देर बाद ट्वीट के जरिये यह मामला रेल मंत्री तक पहुंचा दिया। लखनऊ के वरिष्ठ मंडल संरक्षा आयुक्त ने इसे जांच के लिए मुरादाबाद मंडल को रेफर कर दिया है।
दरअसल नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना करीब एक घंटा 15 मिनट देरी से दोपहर 12.15 बजे पुलिस लाइन पहुंचे और यहीं से सीधे सीबीगंज के गांव खड़ौआ में बने कान्हा उपवन एवं पशु आश्रय गृह के लिए रवाना हो गए। खड़ौआ से कुछ दूर पहले जब उनका काफिला रेलवे क्रॉसिंग पर पहुंचा तो क्रॉसिंग बंद मिला। नगर विकास मंत्री को जल्दबाजी में देखकर उनके काफिले में मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अफसर क्रॉसिंग को खुलवाने की कोशिश करने लगे। इसके बावजूद फाटक नहीं खुला तो नगर विकास मंत्री अपनी गाड़ी से उतर पड़े और नीचे झुककर क्रॉसिंग का एक बैरियर पार करके ट्रैक के पास आ गए। इसी बीच गेटमैन ने क्रॉसिंग खोल दिया।
इसके बाद मंत्री समेत मेयर उमेश गौतम, नगर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव, इंस्पेक्टर सीबीगंज जेपी सिंह और नगर निगम के उपसभापति अतुल कपूर समेत मंत्री के काफिले में मौजूद कई अफसर, जनप्रतिनिधि और भाजपा नेता भी क्रॉसिंग पार कर गए।
कुछ ही देर में मंत्री और अफसरों के बंद क्रॉसिंग को झुककर पार करते हुए फोटो वायरल हुए तो मामला चर्चा में आ गया। डॉ. प्रदीप कुमार ने रेलमंत्री पीयूष गोयल को ‘रूल मेकर ऑर रूल ब्रेकर’ टाइटल से ट्वीट करते हुए पूरे मामले की शिकायत कर दी।
उन्होंने पूछा कि जब मंत्री ही कानून तोड़ेंगे तो आम जनता के बीच क्या संदेश जाएगा। इस ट्वीट का संज्ञान लेते हुए आरपीएफ लखनऊ के वरिष्ठ मंडल संरक्षा आयुक्त ने मामले को जांच के लिए मुरादाबाद मंडल के लिए रेफर कर दिया।
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